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ज्योतिष

Planet Retrograde Meaning: ग्रह वक्री क्यों होते हैं, लाइफ के किस फील्ड पर होता है सबसे अधिक असर; जानें

Planet Retrograde Meaning: ज्योतिष में जब ग्रह सामान्य गति के विपरीत चलता दिखता है, तो उसे वक्री होना कहते हैं. मान्यता है कि यह पृथ्वी द्वारा धीमे ग्रह को ओवरटेक करने से होता है. आइए जानते हैं, वक्री अवस्था में ग्रह का प्रभाव किस फील्ड पर सबसे अधिक होता है?

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Written By: Shyamnandan Updated: May 6, 2026 20:14
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Planet Retrograde Meaning: आपने अक्सर सुना होगा कि बुध वक्री हो गया है या शनि उल्टी चाल चल रहा है, जिससे जीवन में गड़बड़ होगी. ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार, जब कोई ग्रह पृथ्वी की कक्षा के सापेक्ष अपनी सामान्य गति यानी मार्गी पथ से उल्टा या विपरीत दिशा में चलता हुआ दिखता है, तो उसे वक्री ग्रह कहते हैं. वक्री होने पर ग्रह की शक्ति (चेष्टा बल) बहुत बढ़ जाती है और वह सामान्य से अधिक प्रभावशाली हो जाता है. जब तेज रफ्तार पृथ्वी अपनी कक्षा में किसी धीमे ग्रह को ओवरटेक करती है तो वह ग्रह हमें पीछे जाता दिखता है. ठीक वैसे ही जैसे दौड़ती ट्रेन से लगता है कि पटरियां उल्टी भाग रही हैं.

वक्री काल का मनोविज्ञान

ज्योतिष में वक्री ग्रह को अत्यधिक शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि इस समय उसकी ऊर्जा सबसे अधिक बलवती होती है और उसका ‘चेष्टा बल’ जागृत हो जाता है. यह काल कभी नई शुरुआत के लिए शुभ नहीं होता हैं, क्योंकि ग्रह की ऊर्जा अनियंत्रित होती है, जिससे कर्म के फल पर नियंत्रण नहीं रहता है.. मान्यता है कि इस समय ग्रह की ब्रह्मांडीय ऊर्जा बाहर की तरफ बढ़ने के बजाय अंदर की तरफ सिकुड़ती है, जिससे यह समय आत्ममंथन, रुके काम निपटाने और पुरानी गलतियों पर पुनर्विचार का बनता है. यह ‘कर्मों का ऑडिट पीरियड;’ है.

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ग्रह दर ग्रह अलग असर

हर वक्री ग्रह का जीवन के अलग-अलग फील्ड पर वार होता है. बुध जब उल्टा चलता है तो संवाद और करार बिगड़ जाते हैं, ईमेल और मैसेज में गलतफहमी बढ़ती है और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स खराब होने लगते हैं. शुक्र वक्री हो तो प्रेम जीवन में उथल-पुथल मचती है, पुराने प्रेमी लौट आते हैं और शेयर बाजार में अनिश्चितता छा जाती है. मंगल की वक्री चाल साहस को या तो आक्रामकता में बदल देती है या शरीर की सारी ऊर्जा ही खत्म कर देती है.

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गुरु -शनि के वक्री होने का असर

गुरु वक्री होने पर किस्मत सोने चली जाती है. ज्ञान और धार्मिक आस्था पर सवाल उठने लगते हैं और संतान पक्ष से चिंता बढ़ती है. लेकिन सबसे भारी वक्री चाल शनि की होती है, जो करियर और प्रतिष्ठा को सीधे प्रभावित करती है. इस दौरान प्रमोशन अटक जाते हैं, सरकारी काम लटक जाते हैं और जिम्मेदारियों का बोझ अचानक बढ़ जाता है. यह वह समय है जब सिस्टम आपकी परीक्षा लेता है.

सूर्य-चंद्रमा कभी नहीं होते वक्री

यह एक शाश्वत ब्रह्मांडीय सत्य है कि आत्मा के प्रतिनिधि सूर्य और मन के स्वामी चंद्रमा कभी भी उल्टी चाल नहीं चलते. इन दोनों प्रकाशमान ग्रहों की गति एकनियत और अडिग है, इसलिए इनका प्रभाव कभी भ्रमित या उलटा नहीं पड़ता. इनकी नियत चाल व्यक्ति के मूलभूत आत्मबल, आत्मविश्वास और भावनात्मक स्थिरता को इस दृश्य भ्रम से अछूता रखती है, जिससे मनुष्य का मूल स्वभाव हर परिस्थिति में अपनी दिशा बनाए रखता है.

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ये 2 ग्रह रहते हैं हमेशा वक्री

ठीक इसके विपरीत, राहु और केतु नामक छाया ग्रहों का स्वभाव ही सदा वक्री बना रहता है. ये दोनों बिना किसी भौतिक आकृति के केवल गणितीय बिंदु हैं, इसलिए इनकी चाल स्थायी रूप से पीछे की ओर ही निर्धारित है. इनकी इस निरंतर उल्टी गति के कारण जीवन में अनिश्चितता, भटकाव और मायाजाल की स्थितियां बनी रहती हैं, जो व्यक्ति को बार-बार पुराने कर्मों और अनसुलझी गुत्थियों की ओर धकेलती रहती हैं.

वक्री काल में क्या करें?

इस अवधि में न तो नया कारोबार शुरू करें और न ही निवेश के बड़े फैसले लें. यह समय रिफ्लेक्शन और रिव्यू का है. पुराने प्रोजेक्ट पूरे करें, अटके पेमेंट निकालें और रिश्तों की टूटी डोर को जोड़ने की कोशिश करें. घर या दफ्तर में फैले कबाड़ को साफ करना, मेडिटेशन करना और अपनी पुरानी डायरी पढ़ना इस काल का सबसे बड़ा लाभ देता है. जैसे ही ग्रह मार्गी होंगे, आप अंदर से पूरी तरह रिचार्ज होकर नई शुरुआत के लिए तैयार खड़े होंगे.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: May 06, 2026 08:14 PM

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