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Space Astrology Mars: मंगल पर बसने के बाद कैसे बनेगा राशिफल? जानें स्पेस ट्रैवल और ज्योतिष का रहस्य

Space Astrology Mars: अगर इंसान मंगल पर बस गया तो क्या वहां भी राशिफल बनेगा? वैदिक ज्योतिष पर्यवेक्षक की स्थिति पर आधारित है, इसलिए मंगल से ग्रहों की गणना अलग होगी. ऐसे में कुंडली और ज्योतिषीय नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. आइए जानते हैं, क्या होंगे ये बदलाव?

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Space Astrology Mars: नासा (NASA) और कई दूसरी स्पेस एजेंसी मंगल ग्रह पर बहुत ज्यादा फोकस कर रहे हैं कि दूर भविष्य में यहां इंसान बस सकता है. अब जरा कल्पना कीजिए अगर इंसान मंगल ग्रह पर जाकर बस गया, तो क्या वहां राशिफल बनेगा? क्या वहां की कुंडली पृथ्वी की तरह ही काम करेगी? आइए जानते हैं, मंगल पर बस्ती बसने पर ज्योतिष के नियमों में क्या बड़े बदलाव होंगे. क्योंकि, वैदिक ज्योतिष शुरुआत से ही पर्यवेक्षक के दृष्टिकोण पर आधारित है यानी आप जहां से खड़े होकर आकाश देखते हैं, वहीं से ग्रहों की गणना शुरू होती है.

नया केंद्र

अभी धरती पर जो कुंडली बनती हैं, वह जियो-सेन्ट्रिक (Geocentric) है यानी पृथ्वी केंद्रित. लेकिन जब मंगल पर बस जाएंगे, तो वहां जन्म लेने वाले व्यक्ति की कुंडली ‘एरोसेंट्रिक’ (Areocentric) यानी मंगल केंद्रित हो जाएगी. आपको एरोसेंट्रिक ग्रीक के एरीज (Ares) शब्द से निकला है, जिसका रोमन मतलब है मार्स (Mars).

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मंगल होंगे लग्नेश?

मंगल पर जन्म लेने वाले व्यक्ति की कुंडली जब मंगल केंद्रित होगी, तब मंगल पर वह स्वयं लग्नेश यानी ‘भूमि’ बन जाएगा. मंगल की जगह अब पृथ्वी एक चलता हुआ ग्रह होगी. ज्योतिषियों को पृथ्वी के प्रभाव, उसके स्वभाव जैसे मातृत्व, जल तत्व आदि और उसकी राशियों पर होने वाले असर का नया अध्ययन करना होगा.

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दो-दो चांद

पृथ्वी पर चंद्रमा मन, माता और भावनाओं के कारक हैं. वही, मंगल के दो-दो चंद्रमा हैं – फोबोस और डिमोस. वहां पैदा होने वाले बच्चों की कुंडली में एक के बजाय दो चंद्रमाओं की स्थिति देखी जाएगी. यह इंसानी मनोविज्ञान और भावनाओं में दोहरापन या ‘ड्यूल माइंड’ पैदा कर सकता है. मन और भावनाएं अब पहले से अधिक जटिल हो सकती हैं.

बेअसर होंगे राहु-केतु!

वैदिक ज्योतिष में राहु-केतु भौतिक ग्रह न होकर केवल पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षाओं के कटान बिंदु हैं. मान्यता है कि ये बिंदु मंगल पर जाने के बाद बेअसर हो जाएंगे. ज्योतिषियों को मंगल और उसके दो चंद्रमाओं के नए ऑर्बिटल नोड्स यानी कटान बिंदु निकालने होंगे, जो ‘मंगल के राहु-केतु’ की तरह हो सकता है, जिनके स्वभाव और प्रभावों को नए सिरे से समझना होगा.

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समय का बदलाव

धरती पर एक साल 365 दिन का होता है, जबकि मंगल पर यह लगभग 687 दिन. इस बदलाव के कारण ग्रहों के गोचर नियम, गोचर काल, महादशा और अंतर्दशा की पूरी समय-सीमा को नए ज्योतिषीय गणित फॉर्मूले में ढालना होगा, जिससे ज्योतिष का पूरा कैलेंडर बदल जाएगा.

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पृथ्वी-पुत्र का नजरिया

वैदिक ग्रंथों के अनुसार, मंगल ग्रह की उत्पत्ति पृथ्वी से मानी गई है, इसलिए इसे ‘भौम’ ग्रह कहते हैं. मंगल पर बसने के बाद इंसान तकनीकी और आध्यात्मिक रूप से पृथ्वी के बेटे के घर में रहेगा. वहां की कुंडली में ‘माता’ यानी पृथ्वी और ‘पुत्र’ यानी मंगल का संबंध सबसे अहम हो जाएगा. पृथ्वी का स्थान कुंडली में सबसे पूजनीय और प्रभावशाली ग्रहों में गिना जा सकता है.

इस प्रकार स्पेस ट्रैवल से ज्योतिष खत्म नहीं होगा, बल्कि उसका सॉफ्टवेयर और गणितीय नियम अपग्रेड हो जाएंगे. ब्रह्मांड के बदलते संदर्भ के साथ प्राचीन विज्ञान को नया रूप अपनाना ही होगा.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Jun 22, 2026 03:06 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक प्रगतिशील ज्योतिषविद हैं, जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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