Shani Astrology Prediction: नवग्रहों में शनि एक सबसे शक्तिशाली ग्रह हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार, 2027 में शनि ढाई साल बाद राशि परिवर्तन करेंगे और मीन से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही शनि वर्ष का अंत हो जाएगा, जो लगभग पृथ्वी के 30 वर्षों के बराबर होता हैं. आइए जानते हैं, शनि का यह गोचर क्यों इतना खास और खतरनाक माना जा रहा है?
नीच शनि का क्या मतलब?
वर्ष 2027 में जब मेष राशि में गोचर करेंगे, तो उनकी शक्तियों पर जबरदस्त नेगेटिव असर होगा, क्योंकि मंगल ग्रह के स्वामित्व वाली मेष राशि में शनि नीच के हो जाते हैं. शनि के नीच होने का मतलब उनकी शक्तियों की घट जाना है. शनि के इस राशि में रहने से व्यक्ति शनि की प्रकृति के विपरीत जल्दबाजी में निर्णय लेता है. पुराने सिस्टम ढहने लगते हैं. नीतियों में कठोरता आ जाती है.
रियल एस्टेट और गोल्ड का भाव
मंगल भूमि और शनि निर्माण के कारक हैं. मेष अग्नि तत्व की राशि है, जबकि शनि वायु प्रधान ग्रह हैं. ऐसे में रियल एस्टेट क्षेत्र में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव होगा. दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ेगी. लोग निवेश के सुरक्षित विकल्पों की ओर भागेंगे. इससे सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आ सकता है.
वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा
यह देखा गया है कि जब शनि नीच के होते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है. शेयर बाजार धड़ाम से गिरता है. बैंकिंग क्षेत्र में संकट बढ़ जाती हैं. बड़े-बड़े लोन की वापसी असंभव हो जाती है. निर्माण कार्य में उत्पादन घट जाता है. मांग में तेजी से इजाफा है. करेंसी की वैल्यू घट जाती है. परिणामस्वरूप वैश्विक मंदी का दौर शुरू हो सकता है.
प्राकृतिक आपदाएं और मौसम
वायु और अग्नि तत्व का संयोग मौसम और भूमि के लिए काफी संवेदनशील माना जाता है. इस दौरान भूकंप, आग, सूखा, बाढ़, अति-वृष्टि, हिम स्खलन जैसी प्राकृतिक घटनाएं और दुर्घटनाएं अधिक हो सकती हैं. राहत कार्यों में भी परेशानी हो सकती है. इसे उथल-पुथल मच जाती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।