Astrocartography: ऐसी कई कहानियां और बातें आपने सुनी या देखी होंगी, जो यह बताती है कि अमुक व्यक्ति ने अपना गांव, नगर या देश छोड़ दिया, तो उसकी सोई तकदीर जाग गई. वहीं, जब वे अपने गांव या शहर थे तो संघर्ष करते रहते थे, जैसे ही दूसरे शहर या देश में गए, उनकी किस्मत चमकने लगी.
ज्योतिष शास्त्र में इस घटना को 'स्थानिक ज्योतिष' या 'एस्ट्रोकार्टोग्राफी' कहते हैं. यह एक ऐसा विज्ञान है, जो बताता है कि स्थान बदलने पर कुंडली के ग्रह और भाव भी पूरी तरह जागृत हो जाते हैं, जिससे इंसान की तकदीर जाग सकती है. आइए जानते हैं, यह क्यों, कैसे और किनके साथ होता है?
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नई जगह, नई कुंडली
आपको जानकर हैरानी होगी कि नई जगह पर कुंडली नई हो जाती है. यह मनगढ़ंत नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय गणना पर आधारित होता है. मान्यता है कि जब आप किसी नए शहर या देश में स्थायी रूप से रहने जाते हैं, तो ज्योतिषीय गणना के लिए एक नया 'रिलोकेशन चार्ट' बनता है. इसमें जो ग्रह जन्मकुंडली में कमजोर होता, यदि वह नए शहर में जाकर केंद्र भाव (1,4,7 और 10) या त्रिकोण भाव (5 और9) में आ जाता है, तो वह बली हो जाता है. इसी बदलाव से अचानक भाग्य खुल जाता है और नए अवसर मिलने लगते हैं.
विदेश का कारक
वैदिक ज्योतिष में 12वां घर विदेश यात्रा और वहां बसने का मुख्य कारक है. अगर यह भाव मजबूत है, तो व्यक्ति विदेश जाकर खूब धन और प्रसिद्धि कमाता है. वहीं, 7वां घर व्यापार और विदेशी संबंधों को दर्शाता है, जबकि 9वां घर लंबी धार्मिक या भाग्यशाली यात्राओं का होता है. यह देखा गया है कि इन घरों में शुभ ग्रहों की उपस्थिति स्थान परिवर्तन को बेहद लाभकारी बना देती है.
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राहु-शनि की भूमिका
ज्योतिष में राहु ग्रह को विदेशी तत्वों का कारक माना गया है. अगर कुंडली में राहु मजबूत है या उसकी महादशा चल रही है, तो व्यक्ति को जन्मस्थान पर संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन जैसे ही वह विदेश या अलग संस्कृति वाले शहर में जाता है, उसका भाग्य चमक उठता है. कई बार शनि ग्रह भी व्यक्ति को उसकी जन्मभूमि से दूर ले जाकर ही सफलता का स्वाद चखाते हैं.
कब बदलें, कब नहीं?
आपको बता दें, गांव, नगर, शहर या देश बदलना हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता है. यदि कुंडली में 'स्थान परिवर्तन योग' है या चौथा भाव, जो घर और भूमि का है, तो क्रूर ग्रहों से प्रभावित है, तो बाहर जाना ही तरक्की की चाबी होता है. ऐसे लोग बाहर जाकर ही धनवान बनते हैं. इसके विपरीत, अगर चौथा भाव मजबूत और शुभ ग्रहों से दृष्ट है, तो अपने जन्म नगरी में ही रहना लाभकारी है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Astrocartography: ऐसी कई कहानियां और बातें आपने सुनी या देखी होंगी, जो यह बताती है कि अमुक व्यक्ति ने अपना गांव, नगर या देश छोड़ दिया, तो उसकी सोई तकदीर जाग गई. वहीं, जब वे अपने गांव या शहर थे तो संघर्ष करते रहते थे, जैसे ही दूसरे शहर या देश में गए, उनकी किस्मत चमकने लगी.
ज्योतिष शास्त्र में इस घटना को ‘स्थानिक ज्योतिष’ या ‘एस्ट्रोकार्टोग्राफी’ कहते हैं. यह एक ऐसा विज्ञान है, जो बताता है कि स्थान बदलने पर कुंडली के ग्रह और भाव भी पूरी तरह जागृत हो जाते हैं, जिससे इंसान की तकदीर जाग सकती है. आइए जानते हैं, यह क्यों, कैसे और किनके साथ होता है?
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नई जगह, नई कुंडली
आपको जानकर हैरानी होगी कि नई जगह पर कुंडली नई हो जाती है. यह मनगढ़ंत नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय गणना पर आधारित होता है. मान्यता है कि जब आप किसी नए शहर या देश में स्थायी रूप से रहने जाते हैं, तो ज्योतिषीय गणना के लिए एक नया ‘रिलोकेशन चार्ट’ बनता है. इसमें जो ग्रह जन्मकुंडली में कमजोर होता, यदि वह नए शहर में जाकर केंद्र भाव (1,4,7 और 10) या त्रिकोण भाव (5 और9) में आ जाता है, तो वह बली हो जाता है. इसी बदलाव से अचानक भाग्य खुल जाता है और नए अवसर मिलने लगते हैं.
विदेश का कारक
वैदिक ज्योतिष में 12वां घर विदेश यात्रा और वहां बसने का मुख्य कारक है. अगर यह भाव मजबूत है, तो व्यक्ति विदेश जाकर खूब धन और प्रसिद्धि कमाता है. वहीं, 7वां घर व्यापार और विदेशी संबंधों को दर्शाता है, जबकि 9वां घर लंबी धार्मिक या भाग्यशाली यात्राओं का होता है. यह देखा गया है कि इन घरों में शुभ ग्रहों की उपस्थिति स्थान परिवर्तन को बेहद लाभकारी बना देती है.
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राहु-शनि की भूमिका
ज्योतिष में राहु ग्रह को विदेशी तत्वों का कारक माना गया है. अगर कुंडली में राहु मजबूत है या उसकी महादशा चल रही है, तो व्यक्ति को जन्मस्थान पर संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन जैसे ही वह विदेश या अलग संस्कृति वाले शहर में जाता है, उसका भाग्य चमक उठता है. कई बार शनि ग्रह भी व्यक्ति को उसकी जन्मभूमि से दूर ले जाकर ही सफलता का स्वाद चखाते हैं.
कब बदलें, कब नहीं?
आपको बता दें, गांव, नगर, शहर या देश बदलना हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता है. यदि कुंडली में ‘स्थान परिवर्तन योग’ है या चौथा भाव, जो घर और भूमि का है, तो क्रूर ग्रहों से प्रभावित है, तो बाहर जाना ही तरक्की की चाबी होता है. ऐसे लोग बाहर जाकर ही धनवान बनते हैं. इसके विपरीत, अगर चौथा भाव मजबूत और शुभ ग्रहों से दृष्ट है, तो अपने जन्म नगरी में ही रहना लाभकारी है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.