मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग को 22 दिनों से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक कई घातक हमले झेलने के बाद भी तेहरान घुटने टेकने को तैयार नहीं है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान से अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही मिडिल ईस्ट में युद्ध का संकट खत्म हो सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मैं यह सूचित करते हुए प्रसन्न हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान देश ने पिछले दो दिनों में अच्छी और उत्पादक बातचीत की है, जो हमारे शत्रुताओं के पूर्ण और कुल समाधान के संबंध में है.'
राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा, 'इन गहन, विस्तृत और स्वर में रचनात्मक वार्ताओं के विषय में, जो पूरे सप्ताह जारी रहेंगी, मैंने ईरानी बिजली संयंत्रों और ऊर्जा अवसंरचना के खिलाफ किसी भी और सभी सैन्य हमलों को पांच दिनों की अवधि के लिए स्थगित कर दिया है, चर्चाओं और बैठकों के अधीन. इस मामले पर आपके ध्यान के लिए धन्यवाद.'
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ईरान के आगे मजबूर हुई डोनाल्ड ट्रंप ?
गौरतलब है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने एक साथ मिलकर 28 फरवरी, 2026 को हमले शुरू किए थे. इसके जवाब में ईरान ने भी पहले पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर हमले शुरू कर दिए. वहीं, इरजायल पर भी सैंकड़ों की संख्या में मिसाइल दागे. युद्ध ने पूरी दुनिया को उस समय प्रभावित किया जब ईरान ने जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अवरुद्ध कर दिया. इस बीच इजरायल ने ईरान के उर्जा संयंत्रों पर भी हमला किया, और स्थिति और बिगड़ती चली गई. ट्रंप ने कई बार ईरान द्वारा हार मानने का दावा किया, लेकिन अब उनका खुद बातचीत के टेबल पर आना दुनिया को हैरान कर रहा है.
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ईरान ने दी थी खतरनाक वॉर्निंग
बीते दिनों X पर एक पोस्ट में, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि ईरानी ऊर्जा संयंत्रों या बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले से क्षेत्रीय ऊर्जा सुविधाओं पर जवाबी हमले होंगे. गालिबफ ने अपने पोस्ट में कहा, 'हमारे देश में बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने के तुरंत बाद, पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और तेल सुविधाओं को वैध लक्ष्य माना जाएगा और उन्हें अपरिवर्तनीय तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा, और तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी.'
मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग को 22 दिनों से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक कई घातक हमले झेलने के बाद भी तेहरान घुटने टेकने को तैयार नहीं है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान से अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही मिडिल ईस्ट में युद्ध का संकट खत्म हो सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘मैं यह सूचित करते हुए प्रसन्न हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान देश ने पिछले दो दिनों में अच्छी और उत्पादक बातचीत की है, जो हमारे शत्रुताओं के पूर्ण और कुल समाधान के संबंध में है.’
राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा, ‘इन गहन, विस्तृत और स्वर में रचनात्मक वार्ताओं के विषय में, जो पूरे सप्ताह जारी रहेंगी, मैंने ईरानी बिजली संयंत्रों और ऊर्जा अवसंरचना के खिलाफ किसी भी और सभी सैन्य हमलों को पांच दिनों की अवधि के लिए स्थगित कर दिया है, चर्चाओं और बैठकों के अधीन. इस मामले पर आपके ध्यान के लिए धन्यवाद.’
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ईरान के आगे मजबूर हुई डोनाल्ड ट्रंप ?
गौरतलब है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने एक साथ मिलकर 28 फरवरी, 2026 को हमले शुरू किए थे. इसके जवाब में ईरान ने भी पहले पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर हमले शुरू कर दिए. वहीं, इरजायल पर भी सैंकड़ों की संख्या में मिसाइल दागे. युद्ध ने पूरी दुनिया को उस समय प्रभावित किया जब ईरान ने जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अवरुद्ध कर दिया. इस बीच इजरायल ने ईरान के उर्जा संयंत्रों पर भी हमला किया, और स्थिति और बिगड़ती चली गई. ट्रंप ने कई बार ईरान द्वारा हार मानने का दावा किया, लेकिन अब उनका खुद बातचीत के टेबल पर आना दुनिया को हैरान कर रहा है.
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ईरान ने दी थी खतरनाक वॉर्निंग
बीते दिनों X पर एक पोस्ट में, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि ईरानी ऊर्जा संयंत्रों या बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले से क्षेत्रीय ऊर्जा सुविधाओं पर जवाबी हमले होंगे. गालिबफ ने अपने पोस्ट में कहा, ‘हमारे देश में बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने के तुरंत बाद, पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और तेल सुविधाओं को वैध लक्ष्य माना जाएगा और उन्हें अपरिवर्तनीय तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा, और तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी.’