Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
Read More---विज्ञापन---
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिन के भारत दौरे पर पहुंचे हैं. लेकिन ये दौरा अमेरिका और यूरोप के कई देशों को पच नहीं रहा है. भारत में फ़्रांस के राजदूत थिरी मथोउ, जर्मनी के राजदूत फ़िलिप एकरमैन और ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरुन ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख लिखा है. इस लेख में रूस पर कई सवाल उठाए गए हैं. एक दिसंबर को लिखे गए इस लेख में यूक्रेन युद्ध के लिए केवल रूस को जिम्मेदार ठहराया गया है. लेकिन सवाल यह है कि पुतिन के दौरे से पहले यह लेख लिखने के पीछे इनकी क्या मंशा हो सकती है? सवाल यह भी पैदा होता है कि क्या पुतिन का यह दौरा पश्चिम देशों को चुभ रहा है? अगर इसका जवाब हां, है तो हम जानेंगे कि इसके पीछे क्या वजह हो सकती हैं.
पश्चिमी देशों की कोशिश है कि पुतिन को अलग-थलग कर दिया जाए. लेकिन भारत जैसा बड़ा देश पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत करता है. तो ऐसे में यूरोप की इस रणनीति पर पानी फिरता दिख रहा है. जब भारत जैसा बड़ा लोकतांत्रिक देश रूस के साथ बड़े समझौता करता है तो इससे बाकी दुनिया में एक संदेश जाता है कि पुतिन विश्व के अहम नेताओं की लिस्ट में शुमार हैं.
यह भी पढ़ें : भारत में पुतिन के लिए होगी 5-लेयर सिक्योरिटी रिंग, कमांडो-स्नाइपर्स-ड्रोन्स और AI से बनाया जाएगा अभेद सुरक्षा कवच
रूस की इकॉनमी को कमजोर करने के इरादे से यूरोप और अमेरिका ने रूस पर कई बैन लगाए थे. लेकिन भारत सस्ती कीमत पर रूस से कच्चा तेल काफी मात्रा में खरीद रहा है. यूरोप को लगता है कि रूस पर लगे बैन के बावजूद उसे अच्छा-खासा रेवन्यू मिल रहा है, जिसे वह यूक्रेन युद्ध में खर्च कर रहा है. यूरोप को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं है.
यह भी पढ़ें : पुतिन का भारत दौरा खास क्यों? रूसी राष्ट्रपति 30 घंटे में कब क्या करेंगे, शेडयूल आया सामने
अमेरिका और यूरोप चाहता है कि रूस से कोई भी देश डिफेंस इक्विपमेंट या हथियारों का कोई कारोबार ना करे. लेकिन हथियारों के मामले में भारत हमेशा से रूस का सबसे बड़ा और भरोसेमंद खरीदार रहा है. इससे यूरोप की उस रणनीति को धक्का पहुंचता है, जिसमें वह चाहता है कि सैन्य रूप से भी रूस को अलग-थलग कर दिया जाए.
पश्चिमी देश चाहते थे कि भारत यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की खुलकर निंदा करे और वह यूरोप के खेमे में आ जाए. लेकिन भारत ने यहां अपनी विदेश नीति का पालन करते हुए इस पर निष्पक्ष रुख रखा. उसने रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग से दूरी बनाए रखी है. और किसी भी पाले में शामिल नहीं हुआ. भारत के इस निष्पक्ष रुख को पुतिन के दौरे से और मजबूती मिलेगी.
यह भी पढ़ें : ‘जंग लड़नी है, मैं तैयार हूं’, यूरोप-नाटो देशों को पुतिन की चेतावनी, ट्रंप के दूतों संग 5 घंटे चली मीटिंग
अभी भारत ज्यादात्तर देशों के साथ अपना व्यापार डॉलर में करता है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, भारत और रूस अब अपना कारोबार रूपये और रूबल में करने के विकल्प तलाश रहे हैं. ऐसे में पश्चिमी देशों की करेंसी डॉलर को चुनौती मिल सकती है.
अमेरिका और यूरोपीय देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाना चाहते हैं. चीन को बैलेंस करने के लिए ये देश भारत को अहम भागीदार मानते हैं. इन देशों का दबाव दरकिनार करते हुए रूस के साथ भारत करीबी संबंध बनाए हुए है. इससे इन देशों का एशिया में दबदबा कम होता दिख रहा है.
यह भी पढ़ें : 21 तोपों की सलामी, SPG कमांडो, गार्ड ऑफ ऑनर… भारत दौरे पर आए राष्ट्राध्यक्षों की होती है खास मेहमाननवाजी
पश्चिमी देश रूस के खिलाफ पूरी दुनिया को लामबंद करना चाहते हैं. लेकिन पुतिन का भारत दौरा रूस-चीन-भारत के बीच मजबूत होते संबंध का मैसेज देता है. ऐसे में यूरोप के लिए पुतिन के इस दौरे को कूटनीतिक झटके के रूप में देखा जा सकता है.
अब सवाल पैदा होता है कि पश्चिम देशों के इतने दबाव के बावजूद भी भारत रूस के साथ अपने संबंधों को क्यों बनाए हुए है?
कुछ ऐसा होगा पुतिन का भारत दौरा :

न्यूज 24 पर पढ़ें दुनिया, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।