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चीन की JL-3 मिसाइल से क्यों अमेरिका में फैला खौफ? ताकत जानकर हिल गए US के रक्षा विशेषज्ञ!

Intercontinental Missile: चीन वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना का संचालन कर रहा है, जिसके बेड़े में 60 से अधिक परमाणु पनडुब्बियां शामिल हैं. उसकी नई Type 096 सबमरीन इतनी शांत है कि उसे समुद्र की गहराइयों में डिटेक्ट करना बेहद मुश्किल है.

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चीन की नई और बेहद आधुनिक ‘जुलांग-3’ यानी JL-3 मिसाइल के सफल परीक्षण ने अमेरिकी रक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है. वाशिंगटन के रक्षा विशेषज्ञों और पेंटागन ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया है कि चीन की इस तीसरी पीढ़ी की सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) ने अमेरिकी मुख्य भूमि (Mainland US) की सुरक्षा के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. परमाणु पनडुब्बियों (Type 094 और Type 096) से दागी जाने वाली यह मिसाइल बीजिंग को समुद्र के किसी भी कोने से सीधे अमेरिका पर सटीक निशाना लगाने की अभूतपूर्व क्षमता प्रदान करती है.

कितनी ताकतवर है चीनी मिसाइल?

सामरिक विश्लेषकों के अनुसार, JL-3 की सबसे बड़ी ताकत इसकी मारक क्षमता है, जो करीब 10,000 से 14,000 किलोमीटर तक अनुमानित है. इससे पहले चीन की JL-2 मिसाइल की रेंज सीमित थी, जिसके कारण चीनी पनडुब्बियों को अमेरिका तक मार करने के लिए अपने घरेलू समुद्री क्षेत्र के करीब रहना पड़ता था. लेकिन JL-3 ने इस भौगोलिक सीमा को पूरी तरह खत्म कर दिया है. अब अगर चीनी नौसेना की न्यूक्लियर सबमरीन प्रशांत महासागर के सुदूर या गहरे इलाकों में कहीं भी छिपी रहे, तो वह वाशिंगटन, न्यूयॉर्क या लॉस एंजिल्स समेत पूरे अमेरिका को आसानी से अपनी जद में ले सकती है.

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डिफेंस शील्ड को चकमा देने में माहिर

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स में इस बात का विशेष जिक्र है कि JL-3 मिसाइल ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल’ (MIRV) तकनीक से लैस हो सकती है. इसका सीधा मतलब यह है कि एक ही मिसाइल अपने साथ कई परमाणु हथियार (Warrheads) ले जा सकती है, जो हवा में अलग होने के बाद एक साथ कई भिन्न लक्ष्यों को एक साथ नेस्तनाबूद करने में सक्षम हैं. इसके अलावा, इसकी अत्यधिक गति, उन्नत स्टियरिंग सिस्टम और मिसाइल रोधी प्रणालियों को चकमा देने की तकनीक ने अमेरिका के ‘थाड’ (THAAD) और जीएमडी (GMD) जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं.

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वैश्विक सुरक्षा समीकरणों में बड़ा बदलाव

चीन वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना का संचालन कर रहा है, जिसके बेड़े में 60 से अधिक परमाणु पनडुब्बियां शामिल हैं. उसकी नई Type 096 सबमरीन इतनी शांत है कि उसे समुद्र की गहराइयों में डिटेक्ट करना बेहद मुश्किल है. इस बढ़ती सैन्य शक्ति के जवाब में अमेरिका ने भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ रणनीतिक सहयोग तेज कर दिया है, साथ ही ‘ऑकस’ (AUKUS) समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बियां सौंपने की तैयारी की जा रही है.

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First published on: Jul 07, 2026 11:31 PM

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