Edited By : Versha Singh|Updated: Jun 18, 2026 13:05
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भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच व्यापारिक रिश्तों का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है. आगामी 15 जुलाई 2026 से दोनों देशों के बीच ‘व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता’ (CETA) आधिकारिक तौर पर लागू हो जाएगा. इसके साथ ही, सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद अहम समझौता (DCC) भी इसी दिन से प्रभाव में आएगा. इस ऐतिहासिक कदम से न सिर्फ 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी ड्यूटी (टैक्स) के सीधी एंट्री मिलेगी, बल्कि वहां काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए दोहरे टैक्स से छूट की सीमा भी 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है.
A historic milestone for India-UK relations.
Delighted to note that the India-UK Comprehensive Economic and Trade Agreement will enter into force on 15th July 2026.
This agreement will significantly boost our bilateral trade and investment.
भारतीय सामानों के लिए ब्रिटेन का बाजार हुआ टैक्स फ्री
इस नए व्यापारिक ढांचे के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा मिलने वाला है. अब तक जिन सामानों पर ब्रिटेन में भारी टैक्स लगता था, वे अब बिना किसी ड्यूटी के वहां आसानी से बिक सकेंगे. प्रोसेस्ड फूड पर लगने वाला 70 प्रतिशत तक का टैक्स, समुद्री उत्पादों पर 21.5 प्रतिशत, इंजीनियरिंग व ऑटो पार्ट्स पर 18 प्रतिशत, चमड़े व जूतों पर 16 प्रतिशत तथा कपड़ों पर 12 प्रतिशत तक का भारी-भरकम आयात शुल्क अब शून्य हो जाएगा. आसान भाषा में कहें तो, भारत के छोटे-बड़े कारखानों, किसानों व मछुआरों का सामान अब ब्रिटेन के बाजारों में अपनी सही कीमत पर बिकेगा. इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई ताकत मिलेगी. हालांकि, डेयरी उत्पादों, अनाज, सेब जैसे भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को बाहरी आयात के दबाव से पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है.
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सर्विस सेक्टर को होगा फायदा
सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि भारत की सर्विस इंडस्ट्री के लिए भी यह समझौता एक टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है. ब्रिटेन ने 137 ऐसे सर्विस सेक्टर्स में भारत को एंट्री दे दी है, जिनमें हमारा दबदबा है. इसमें आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज, शिक्षा, टेलीकॉम, हेल्थकेयर शामिल है.
ब्रिटने जाने वाले कर्मचारियों को भी मिलेगी राहत
नए सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत, अब अस्थायी तौर पर ब्रिटेन जाने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां के दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान (डबल टैक्स) से 5 साल तक की छूट मिलेगी. इससे 75 हजार से ज्यादा पेशेवरों के साथ-साथ करीब 900 कंपनियों को सीधा आर्थिक फायदा होगा. इसके अलावा, एक नई और खास व्यवस्था के तहत 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक व शास्त्रीय संगीतकारों को भी हर साल ब्रिटेन में काम करने के विशेष मौके मिलेंगे.
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क्या हैं इस समझौते के फायदे?
दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से मुक्ति: डीसीसी भारतीय श्रमिकों और नियोक्ताओं को यूके में अस्थायी असाइनमेंट के दौरान दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान करने से मुक्त करता है. पहले यह छूट तीन साल की थी, जिसे अब बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है.
व्यापक लाभ: इस समझौते से 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 से अधिक कंपनियों को लाभ होने की उम्मीद है.
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कर्मचारियों की गतिशीलता में वृद्धि: यह समझौता अस्थायी विदेशी असाइनमेंट पर जाने वाले कर्मचारियों की गतिशीलता का समर्थन करेगा और उनकी सामाजिक सुरक्षा कवरेज को जारी रखेगा.
सेवा क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा: यह समझौता भारत-यूके की सेवा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करेगा, जिससे दोनों देशों के उच्च कौशल और नवीन सेवा क्षेत्रों का लाभ उठाया जा सकेगा.
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स्टील निर्यातकों के हितों को रखा गया सुरक्षित
किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में घरेलू उद्योगों की रक्षा सबसे अहम होती है. कुल 30 अध्यायों वाले इस ढांचे में भारत ने अपने स्टील निर्यातकों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है. 1 जुलाई 2026 से ब्रिटेन द्वारा स्टील पर लागू किए जा रहे नए सख्त नियमों के बावजूद, भारत के 85 प्रतिशत स्टील निर्यात को इसके असर से बाहर रखा गया है. बाकी बचे हिस्से को भी खास कोटा सिस्टम के जरिए संरक्षित किया गया है. यह व्यापार समझौता केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ेगा. इससे महिलाओं, युवाओं, स्टार्टअप्स व एमएसएमई (MSME) सेक्टर को दुनिया के एक बड़े उपभोक्ता बाजार से जुड़ने का सीधा मौका मिलेगा. मई 2021 में जिस साझेदारी की नींव रखी गई थी, वह 14 दौर की लंबी बातचीत के बाद अब जमीन पर उतरकर भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति बनाने के लिए तैयार है.