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क्या होता है रासायनिक युद्ध? जिसका ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर लगाया आरोप

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों से हजारों टन कच्चे तेल और रासायनिक ईंधन लीक हो गया, जिसकी भाप ने आसपास के गांवों में सांस लेने की तकलीफ, जलन और उल्टी जैसी बीमारियां फैला दीं.

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Edited By : Akarsh Shukla Updated: Mar 9, 2026 00:16

मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध के बीच ईरान ने एक ऐसा आरोप लगाया है जो अंतरराष्ट्रीय कानून की नींव हिला सकता है. तेहरान ने अमेरिका और इजरायल पर रासायनिक युद्ध छेड़ने का इल्जाम ठोका है, दावा करते हुए कि दोनों देशों के हालिया हवाई हमलों ने ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर लाखों नागरिकों को विषाक्त पदार्थों के खतरे में डाल दिया. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘ये हमले मात्र सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रासायनिक आक्रमण हैं, जो हमारे लोगों पर जहर उंडेलने जैसा है.’

क्या होता है रासायनिक युद्ध?


सबसे पहले समझना जरूरी है कि रासायनिक युद्ध आखिर होता क्या है. अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह युद्ध का वह रूप है जिसमें विषैले रासायनिक पदार्थों जैसे गैस, धुंध या तरल रसायनों का इस्तेमाल सैनिकों या नागरिकों को मारने, घायल करने या क्षेत्र को रहने लायक न करने के लिए किया जाता है.

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रासायनिक हथियारों की चार मुख्य कैटेगरी हैं- श्वास नली को प्रभावित करने वाले (जैसे क्लोरीन गैस), त्वचा को झुलसाने वाले (मस्टर्ड गैस), रक्त को जहर देने वाले (हाइड्रोजन साइनाइड) और तंत्रिका तंत्र को नष्ट करने वाले (सारिन या VX). प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी द्वारा क्लोरीन गैस का इस्तेमाल इसका कुख्यात उदाहरण है, जिसने हजारों सैनिकों की जान ली.

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रासायनिक हथियारों का उपयोग अपराध


1993 के रासायनिक हथियार निषेध संधि (CWC) के तहत इनका उपयोग अपराध माना जाता है, लेकिन ईरान का दावा है कि ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों से निकले ईंधन रिसाव ने इसी तरह का प्रभाव पैदा किया. 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र और खार्ग द्वीप के तेल रिफाइनरी पर सटीक हमले किए. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों से हजारों टन कच्चे तेल और रासायनिक ईंधन लीक हो गया, जिसकी भाप ने आसपास के गांवों में सांस लेने की तकलीफ, जलन और उल्टी जैसी बीमारियां फैला दीं.

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First published on: Mar 08, 2026 08:38 PM

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