जापान बनाने जा रहा है दूसरी राजधानी, आखिर टोक्यो से क्या है परेशानी? रेस में इन शहरों के नाम

Japan’s Second Capital: जापान का नाम सुनते ही जिस शहर का नाम सबसे पहले जेहन में आता है, वो है यहां की राजधानी टोक्यो, जो दुनिया के सबसे बड़ी आबादी वाले शहरों में से एक है, लेकिन अब ये अपने देश की इकलौती राजधानी नहीं रहेगी, क्योंकि इस मुल्क की सरकार ने सेकेंड कैपिटल चुनने का प्लान बना लिया है.

Tokyo AI Image

Tokyo (AI Image)

Why Japan Wants A Second Capital Beyond Tokyo: इस बात से हम सभी वाकिफ हैं कि जापान की राजधानी टोक्यो है, लेकिन ये देश अब अपनी नई कैपिटल चुनने जा रहा है, यहां की संसद ने इसके लिए मंजूरी दे दी है. ये प्रस्ताव निचले सदन में आसानी से पास हो गया, लेकिन ऊपरी सदन में इसे बहुत कम अंतर से मंजूरी मिली, जिससे पूरे देश में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि कौन सा शहर ये रोल निभा सकता है.

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सरकार ने क्यों लिया ऐसा फैसला?

सरकार का कहना है कि इस प्लान का मकसद बड़े इमरजेंसी सिचुएशन के दौरान कामकाज को जारी रखना है. अधिकारियों ने लंबे समय से चेतावनी दी है कि टोक्यो में भूकंप का बड़ा खतरा है; अनुमान बताते हैं कि अगले 3 दशकों के भीतर मेट्रोपॉलिटन इलाके में 7 तीव्रता का भूकंप आने की काफी ज्यादा आशंका है. ऐसी आपदा पीएम ऑफिस, संसद और अहम वित्तीय संस्थानों के कामकाज में रुकावट पैदा कर सकती है. अगर टोक्यो पर असर होता है, तो दूसरी राजधानी होने से जरूरी सरकारी कामकाज जारी रह सकेंगे.

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टोक्यो पर प्रेशर घटाने की कोशिश

इस प्रपोजल का मकसद टोक्यो में आबादी और आर्थिक गतिविधियों के भारी जमावड़े को कम करना भी है. मौजूदा राजधानी जापान के कुल इकॉनमिक एक्टिविटी का तकीबन 5वां हिस्सा है और देश की लगभग 30 फीसदी आबादी यहीं रहती है. नीति-निर्माताओं का मानना ​​है कि एक और प्रशासनिक केंद्र में इंवेस्टमेंट करने से रीजनल डेवलपमेंट में ज्यादा बैलेंस आ सकता है.

क्या है एलिजिबिलिटी?

कानून में किसी खास शहर का नाम नहीं बताया गया है. इसके बजाय, इसमें एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया तय किए गए हैं, जिनके तहत चुने जाने वाले शहरों में आपदा का कम जोखिम, मजबूत बुनियादी ढांचा, पर्याप्त आबादी, प्रशासनिक क्षमता और स्टेबल इकॉनमी होनी चाहिए.

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रेस में इन शहरों के नाम

ओसाका, आइची, फुकुओका और होक्काइडो समेत कई प्रांतों ने पहले ही इसमें दिलचस्पी दिखाई है. इनमें से ओसाका को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है क्योंकि इसकी अर्थव्यवस्था बड़ी है और ये जापान का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रोपॉलिटन इलाका है. हालांकि, नानकाई ट्रफ भूकंप के संभावित खतरे और बड़ी कंपनियों के धीरे-धीरे दूसरी जगहों पर जाने को लेकर चिंताएं भी बनी हुई हैं.

विरोध में भी उठ रही आवाज

इस प्रपोजल की आलोचना भी हुई है. कुछ विरोधियों का तर्क है कि इस पहल से ‘जापान इनोवेशन पार्टी’ को राजनीतिक फायदा हो सकता है, जो लंबे समय से ओसाका में प्रशासनिक सुधारों की वकालत करती रही है. वहीं, कुछ लोग इस प्लान के असर पर सवाल उठाते हैं; उनका कहना है कि टोक्यो ही प्राइमरी कैपिटल बना रहेगा और भविष्य में सरकार को कितना और कहां ट्रांसफर किया जाएगा, ये अभी तय नहीं हुआ है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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