अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों के खिलाफ सीनेट में एक विशेष बिल पास कराया है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी है. अमेरिकन सीनेट में बिल 86-11 वोटों से पास हुआ है और अब इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में भेजा जाएगा, जहां बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाएगा, जो इसे मंजूरी देंगे और फिर बिल कानून बन जाएगा.
टैरिफ की वसूली पर ट्रंप का नया फैसला, कंपनियों को लौटाए 100 अरब डॉलर, जानें भारत को क्या होगा फायदा?
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भारत के अलावा इन 4 देशों पर भी लगेगा टैरिफ
100 प्रतिशत टैरिफ वाले बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से ही सीनेट में पेश किया गया. वहीं बिल पास होकर कानून बना तो भारत, चीन, स्लोवाकिया, अजरबैजान और हंगरी पर 100% टैरिफ ट्रंप सरकार लगा सकेगी. 23 जुलाई को यह बिल पेश हुआ था, जिसमें 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन विरोध के बाद इसे घटाकर 100 कर दिया गया. बिल का मकसद तेल-गैस व्यापार से रूस को होने वाली कमाई घटाना है, ताकि उसकी युद्ध क्षमता कमजोर पड़े.
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कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ेंगे
बता दें कि रूस और भारत के बीच सबसे ज्यादा कच्चे तेल का व्यापार होता है, जो रूस से भारत के कुल आयात का बहुत बड़ा हिस्सा है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के चलते प्रतिबंधों के कारण रूस से भारत का कच्चा तेल व्यापार कम हुआ है. भारत ने जून 2026 में रूस से प्रतिदिन 26.1 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है, जो रूस से कुल कच्चे तेल के व्यापार का 52.4% था. लेकिन मई महीने की तुलना में भारत ने रूस से जून में 39 प्रतिशत ज्यादा कच्चा तेल खरीदा है.
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यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया. इस तरह भारत लगातार रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है. लेकिन अगर अमेरिका ने भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया तो कच्चा तेल महंगा हो जाएग, फिर कच्चे तेल से बनने वाली सभी चीजों के रेट भारत में बढ़ेंगे. जैसे कच्चे तेल से बनने वाले पेट्रोल, डीजल, LNG-CNG-PNG-LPG के दाम बढ़ेंगे, जिसका बोझ भारतीयों की जेब पर पड़ेगा.
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भारत और रूस के बीच इन चीजों का व्यापार होता
बता दें कि कच्चे तेल के अलावा भारत और रूस के बीच रक्षा उपकरणों, उर्वरक, कोयला, खनिज पदार्थों, कीमती पत्थरों और वनस्पति तेल का व्यापार भी होता है. रूस से भारत अपनी सेनाओं के लिए हथियार, मिसाइलें, फाइटर जेट और स्पेयर पार्ट्स खरीदता है. एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए जरूरी रासायनिक उर्वरक और खाद भी रूस से खरीदी जाती है. इसके अलावा भारत अब तक रूस से इंडस्ट्रियल और एनर्जी सेक्टर के लिए कोकिंग कोल और अन्य ठोस ईंधन खरीदता आया है.
रूस से भारत कीमती पत्थर और धातुएं जैसे हीरे, मोती और रत्न खरीदता है. रूस से भारत ने सूरजमुखी का तेल और दूसरे खाने वाले तेल खरीदे हैं. भारत और रूस के बीच अरबों डॉलर का व्यापार हौता हो और भारत रूस का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है.