Specialty Drugs Exempt From New US Tariff: अमेरिका कुछ पेटेंट फार्मास्युटिकल इम्पोर्ट्स पर 100 फीसदी टैरिफ लगा रहा है, लेकिन कई हाइली स्पेशलाइज्ड मेडिसिन को न्यू लेवी से बाहर रखा जाएगा. छूट में रेयर डिजीज, कैंसर, इनफर्टिलिटी और दूसरे क्रिटिकल मेडिकल जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं शामिल हैं.
भारत के लिए भी नियम लागू
भारत उन 20 ज्यूरिडिक्शंस में से एक है, जिनके एलिजिबल स्पेशियलिटी फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स और उससे जुड़े इंग्रेडिएंट्स नए ढांचे के तहत जीरो परसेंट टैरिफ के साथ अमेरिका में एंट्री कर सकती हैं. ये रूल इफेक्टिव हो गए हैं क्योंकि वाशिंगटन 29 सितंबर को अपनी फार्मास्युटिकल टैरिफ पॉलिसी को लागू करना शुरू कर रहा है.
कौन सी दवाइयों पर छूट है?
टैरिफ सभी दवाओं पर लागू नहीं होता. जेनेरिक फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स और उनसे जुड़ी सामग्रियां धारा 232 फार्मास्युटिकल टैरिफ के बाहर हैं. नई ड्यूटीज खास तौर से स्पेसिफाइड पेटेंट दवाओं औरइंग्रेडिएंट्स पर फोकस्ड हैं.
1 ऑर्फेन ड्रग्स: वो दवाइयां जिनका अप्रूव्ड यूजेज अमेरिकी ऑर्फेन ड्रग्स एक्ट के तहत रेयर डिजीज के लिए डेजिग्नेटेड है, छूट के दायरे में आती हैं.
2 न्यूक्लियर मेडिसिन: कैंसर से जुड़े इस्तेमाल सहित मेडिकल डायग्नोसिस या ट्रीटमेंट के लिए रेडियोएक्टिव मैटेरियल वाले क्वालिफाइंग प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं
3 प्लाज्मा-डेराइव्ड थेरेपी: ह्यूमन ब्लड प्लाज्मा के कंपोनेंट्स का इस्तेमाल करके तैयार होने वाली दवाएं, जिनमें इम्यून डेफिशिएंसी और ब्लीडिंग डिसऑर्डर के इलाज शामिल हैं, उन्हें टैरिफ से राहत मिलेगी.
4 फर्टिलिटी मेडिसिन: फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं को खास तौर से टैरिफ रिलीफ वाले प्रोडक्ट्स में शामिल किया गया है.
5 सेल थेरेपी: इस कैटेगरी में सेल्युलर इम्यूनोथैरेपी, सेल्युलर कैंसर वैक्सीन और कुछ स्टेम-सेल-बेस्ड ट्रीटमेंट शामिल हैं.
6 जीन थेरेपी: थेरप्यूटिक जरूरतों के लिए जीन एक्सप्रेशन को मोडिफाई करने या लिविंग सेल को बदलने के लिए डिजाइन किए गए ट्रीटमेंट भी शामिल हैं.
7 एंटीबॉडी ड्रग कॉन्गुलेट: ये टारगेटेड मेडिसिन मोलेक्युल्स के साथ एंटीबॉडी को जोड़ती हैं और ज्यादातर खास कैंसर ट्रीटमेंट में काम आती हैं.
8 सीबीआरएन मेडिकल काउंटरमेजर्स: केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल या न्यूक्लियर खतरों से जुड़े कंडीशंस को रोकने, डायग्नोसिस या इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ प्रोडक्ट्स को छूट दी गई है.
9 एनिमल हेल्थ मेडिसिन: वेटेनरी फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स को भी इस फ्रेमवर्क के तहत टैरिफ से छूट मिलती है.
भारत के लिए इसका फायदा
ये टैरिफ रिलीफ इंडियन फार्मास्युटिकल एक्सपोटर्स को एक बड़ी छूट के बजाय एक टारगेटेड रिलीफ देती है. प्रोडक्ट को प्रेसक्राइब्ड कैटेगरी और एलिजिबिलिटी की जरूरतों को पूरा करना होगा. इस लिस्ट में भारत को शामिल करने का मतलब है कि स्पेशियलिटी मेडिसिन और उनके इंग्रेडिएंट्स नए 100 परसेंट ड्यूटी से बच सकते हैं और उन कंपनियों पर खर्च का एक्सट्रा प्रेशर नहीं पड़ेगा. इस बीच जेनेरिक दवाएं जो अमेरिका को भारत के फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट की एक अहम कंपोनेंट हैं, वो सेक्शन 232 फार्मास्युटिकल टैरिफ के बाहर बनी हुई हैं.