एस्सार ग्रुप बनाएगा अमेरिका का सबसे बड़ा स्टील प्लांट, ट्रंप ने किया $15 बिलियन प्रोजेक्ट का ऐलान
भारतीय कंपनियों का डंका अब केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका में भी बज रहा है. एस्सार ग्रुप का यह प्रोजेक्ट भारत-अमेरिका के औद्योगिक संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है.
भारतीय दिग्गज एस्सार ग्रुप अमेरिका में इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बनाने जा रहा है. (Photo - ANI)
अगर आपसे कोई कहे कि भारत का एक बड़ा बिजनेस ग्रुप अमेरिका की धरती पर इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बनाने जा रहा है, तो आपको गर्व महसूस होगा ना? जी हां, खबर ही कुछ ऐसी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में खड़े होकर एक ऐसा ऐलान किया है जिसने पूरी दुनिया के इंडस्ट्रियल जगत में तहलका मचा दिया है.
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भारतीय मल्टीनेशनल कंपनी एस्सार ग्रुप (Essar Group) की मिल्कियत वाली कंपनी मेसाबी मेटालिक्स (Mesabi Metallics) अमेरिका के आयवा (Iowa) राज्य में 15 अरब डॉलर यानी लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा स्टील कॉम्प्लेक्स बनाने जा रही है.
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इतना ही नहीं, एस्सार ग्रुप अमेरिका में कुल 18 अरब डॉलर का भारी भरकम निवेश कर रहा है. आइए, समझते हैं कि एस्सार ग्रुप का यह मास्टरस्ट्रोक क्या है, मिनेसोटा की खदानों से आयवा की फैक्ट्री तक यह पूरा चक्र कैसे चलेगा और ट्रंप इसके लिए क्यों गदगद हैं.
#WATCH | Washington DC | Mesabi Metallics chairman Rewant Ruia says, "Thank you, US President Donald Trump, for bringing back the importance of building things in America… With the new steel complex in Iowa, we will complete the fully integrated American supply chain, from mine… https://t.co/cJJWyT51qQpic.twitter.com/uY7wDphhhj
मिनेसोटा की खदान से आयवा की फैक्ट्री तक: कैसे बनेगा देसी स्टील?
इस पूरे प्रोजेक्ट का मॉडल बड़ा ही दिलचस्प और इंटिग्रेटेड है. एस्सार की कंपनी मेसाबी मेटालिक्स ने मिनेसोटा (Minnesota) की मेसाबी आयरन रेंज में अपनी लोहे की खदान (Iron Ore Mine) विकसित करने के लिए $2.5 अरब से ज्यादा का निवेश किया है. यह अमेरिका में पिछले 50 से भी ज्यादा सालों में खुलने वाली पहली नई लोहे की खदान है.
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मिनेसोटा की इस खदान से कच्चा लोहा (Iron Ore) निकाला जाएगा और इसे करीब 250 मील दूर पड़ोसी राज्य आयवा (Iowa) ले जाया जाएगा. आयवा के इस महा-प्लांट में कच्चे लोहे से स्टील बनाया जाएगा. पहले फेज में सालाना 75 लाख टन स्टील बनेगा, जो आगे चलकर 1 करोड़ टन (10 Million Tons) सालाना तक पहुंच जाएगा. आपको ता दें कि यहां से पहला स्टील उत्पादन साल 2030 में शुरू होने की उम्मीद है.
मिनेसोटा में खदान तो आयवा में प्लांट क्यों? अब आप सोच रहे होंगे कि जब लोहा मिनेसोटा में निकल रहा है तो प्लांट आयवा में क्यों? इसके पीछे 2 मेन कारण माने जा रहे हैं. पहली वजह है सस्ती बिजली (Electricity Costs). स्टील बनाने की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा बिजली लगती है. आयवा में कमर्शियल बिजली की दरें मिनेसोटा के मुकाबले थोड़ी सस्ती हैं.
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और दूसरी वजह है बाजार की नजदीकी. आयवा का लोकेशन मध्य-अमेरिका (Central US) के बड़े औद्योगिक ग्राहकों और बाजारों के काफी करीब है.
नौकरियों की बारिश और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर वाइट हाउस के अनुमान के मुताबिक, यह सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं बल्कि रोजगार का बहुत बड़ा जरिया बनने वाला है. आइये आंकड़ों की मदद से सकझते हैं:
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350 नौकरियां: मिनेसोटा की खदान में मिलेंगी. 1750 स्थायी नौकरियां: आयवा प्लांट में ऑपरेशन शुरू होने पर मिलेंगी. 5000 से 6000 कंस्ट्रक्शन जॉब्स: निर्माण कार्य के दौरान पैदा होंगी. 95 अरब डॉलर का आर्थिक असर: इस प्रोजेक्ट के निर्माण और शुरुआती 10 सालों के ऑपरेशन के दौरान ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर करीब 95 अरब डॉलर का असर (Economic Impact) देखने को मिलेगा.
ट्रंप के टैरिफ दांव का कमाल डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही विदेशी स्टील पर 50% का भारी-भरकम आयात शुल्क (Import Tariff) ठोक दिया था. ट्रंप का दावा है कि भारी टैरिफ की वजह से ही अब बाहरी कंपनियां अमेरिका में आकर अपने प्लांट लगा रही हैं ताकि उन्हें टैक्स न देना पड़े.