अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौता होने के बाद आज स्विट्जरलैंड में पहली परमाणु समझौता वार्ता होगी। अमेरिकी की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बर्गेनस्टॉक पहुंच चुके हैं। ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासेर हेम्मती बातचीत में हिस्सा लेंगे। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी मध्यस्थ देश के प्रतिनिधि के तौर पर पहुंचे हैं। अमेरिका ने ईरान को एक ऑफर दिया है, जिस पर ईरान आज फैसला भी बताएगा।
ईरान को अमेरिका का शानदार ऑफर
स्विट्जरलैंड में आज होने वाली परमाणु समझौता वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। आज बातचीत का नतीजा तय करेगा कि दोनों देशों के बीच वार्ता आगे बढ़ेगी या नहीं। अमेरिका चाहता है कि पहली ही बैठक में ईरान अपने उन परमाणु ठिकानों की जांच करने की अनुमति अमेरिका को दे दे, जहां संवर्धित यूरेनियम को छिपाकर रखा गया है। इसके लिए अमेरिका ने ईरान को 6 अरब डॉलर देने का ऑफर दिया है। जून 2025 से अमेरिकी विशेषज्ञ इनका निरीक्षण नहीं कर पाए हैं।
कतर में फ्रीज 6 अरब डॉलर मिल जाएंगे
अमेरिका ने ईरान को ऑफर दिया है कि अगर अमेरिका को परमाणु ठिकानों की जांच की परमिशन मिलती है तो ईरान के कतर में फ्रीज 6 अरब डॉलर के फंड का एक्सेस मिल जाएगा। इस फंड का इस्तेमाल ईरान अपनी मानवीय जरूरतों को पूरा करने, पुनर्निर्माण करने, खाद्य पदार्थ, दवाइयां खरीदने समेत कई तरह के विकास कार्यों में कर सकेगा, यानी अमेरिका का ऑफर स्वीकार करने में देश की जनता का भला होगा। इस ऑफर पर ईरान को आज बैठक में अपना फैसला सुनाना है। उसके बाद ही आगे की दिशा तय होगी।
Mou की अहम शर्त परमाणु समझौता वार्ता
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच अंतरिम समझौता साइन हुआ है। इसके तहत दोनों देश 60 दिन के अंदर परमाणु समझौता करेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रमों, प्रतिबंधों में ढील, लेबनान सीजफायर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विवादित मुद्दों पर चर्चा होगी। स्विट्जरलैंड की आज होने वाली बैठक सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता की दिशा तय करेगी। अगर शुरुआत में ही भरोसा कायम हुआ तो समझौते को नई दिशा मिल सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौता होने के बाद आज स्विट्जरलैंड में पहली परमाणु समझौता वार्ता होगी। अमेरिकी की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बर्गेनस्टॉक पहुंच चुके हैं। ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासेर हेम्मती बातचीत में हिस्सा लेंगे। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी मध्यस्थ देश के प्रतिनिधि के तौर पर पहुंचे हैं। अमेरिका ने ईरान को एक ऑफर दिया है, जिस पर ईरान आज फैसला भी बताएगा।
ईरान को अमेरिका का शानदार ऑफर
स्विट्जरलैंड में आज होने वाली परमाणु समझौता वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। आज बातचीत का नतीजा तय करेगा कि दोनों देशों के बीच वार्ता आगे बढ़ेगी या नहीं। अमेरिका चाहता है कि पहली ही बैठक में ईरान अपने उन परमाणु ठिकानों की जांच करने की अनुमति अमेरिका को दे दे, जहां संवर्धित यूरेनियम को छिपाकर रखा गया है। इसके लिए अमेरिका ने ईरान को 6 अरब डॉलर देने का ऑफर दिया है। जून 2025 से अमेरिकी विशेषज्ञ इनका निरीक्षण नहीं कर पाए हैं।
कतर में फ्रीज 6 अरब डॉलर मिल जाएंगे
अमेरिका ने ईरान को ऑफर दिया है कि अगर अमेरिका को परमाणु ठिकानों की जांच की परमिशन मिलती है तो ईरान के कतर में फ्रीज 6 अरब डॉलर के फंड का एक्सेस मिल जाएगा। इस फंड का इस्तेमाल ईरान अपनी मानवीय जरूरतों को पूरा करने, पुनर्निर्माण करने, खाद्य पदार्थ, दवाइयां खरीदने समेत कई तरह के विकास कार्यों में कर सकेगा, यानी अमेरिका का ऑफर स्वीकार करने में देश की जनता का भला होगा। इस ऑफर पर ईरान को आज बैठक में अपना फैसला सुनाना है। उसके बाद ही आगे की दिशा तय होगी।
Mou की अहम शर्त परमाणु समझौता वार्ता
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच अंतरिम समझौता साइन हुआ है। इसके तहत दोनों देश 60 दिन के अंदर परमाणु समझौता करेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रमों, प्रतिबंधों में ढील, लेबनान सीजफायर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विवादित मुद्दों पर चर्चा होगी। स्विट्जरलैंड की आज होने वाली बैठक सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता की दिशा तय करेगी। अगर शुरुआत में ही भरोसा कायम हुआ तो समझौते को नई दिशा मिल सकती है।