---विज्ञापन---

दुनिया angle-right

‘ट्रंप की जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं’, अमेरिका के खिलाफ ग्रीनलैंड के लोगों में उबाल, सड़कों पर उतरे लोग

Protest in Greenland: अमेरिका के खिलाफ ग्रीनलैंड में लोग सड़कों पर उतरे और नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. ग्रीनलैंड के लोगों का कहना है कि उन्हें अमेरिका की दास्ता स्वीकार नहीं है और वे किसी कीमत पर ग्रीनलैंड को अमेरिका को नहीं देने देंगे.

---विज्ञापन---

Protest in Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जाने के लिए खुलकर सामने आ गए हैं. वहीं ट्रंप की इस जबरदस्ती को लेकर जहां नाटो और यूरोपीय देश एकजुट हो गए हैं, वहीं ग्रीनलैंड के लोगों में भी उबाल है. बीते दिन जहां डेनमार्क और यूरोप के NATO देशों ने ग्रीनलैंड में सेना की तैनाती शुरू की, वहां ग्रीनलैंड के लोग भी सड़कों पर उतरे और ट्रंप सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. हजारों की संख्या में लोग राजधानी नुक में सड़कों पर उतरे.

प्रधानमंत्री ने खुद की मार्च की अगुवाई

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में लोगों ने प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन की अगुवाई में US कॉन्सुलेट तक मार्च निकाला. प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए लोगों ने अमेरिका और ट्रंप को साफ-साफ संदेश दिया कि ग्रीनलैंड अपने भविष्य का फैसला खुद लेगा. प्रदर्शनकारी उस निर्माणाधीन ब्लॉक के बाहर जुटे, जहां अमेरिका अपने कॉन्सुलेट को शिफ्ट करने की योजना बना रहा है. फिलहाल अमेरिकी कॉन्सुलेट लकड़ी की इमारत में चलता है, जहां 4 कर्मचारी तैनात हैं.

---विज्ञापन---

अमेरिका को इसलिए चाहिए ग्रीनलैंड

बता दें कि ग्रीनलैंड अमेरिका और यूरोप के बॉर्डर पर बसा देश है, जिसका ज्यादातर हिस्सा अमेरिका से लगता है, लेकिन वर्ष 1700 से ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का कब्जा है. वहीं इसके एक तरफ रूस भी है, जो आर्कटिक के रास्ते ग्रीनलैंड होते हुए चीन तक अपने कच्चे तेल की सप्लाई करता है. क्योंकि ग्रीनलैंड के आस-पास रूस और चीन की गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिससे अमेरिका चिंतित है. ग्रीनलैंड कई खनिज पदार्थों और रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार है तो अमेरिका नहीं चाहता कि इस देश पर रूस या चीन कब्जा करें.

ग्रीनलैंड को खरीदने का ऑफर दिया

इसलिए अमेरिका उसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी मानता है. उस पर कब्जा करके उसे अमेरिका का राज्य बनाकर अपना सैन्य बेस बनाना चाहता है. कई बार ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश हो चुकी है, वहीं इस बार डील न हुई तो कब्जा करने की प्लानिंग है. ट्रंप भी कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए बल का प्रयोग करने से भी इनकार नहीं किया जा सकता. इसलिउ डेनमार्क के अनुरोध पर यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य कर्मी तैनात किए हैं और NATO देश एकजुट होकर अमेरिका का विरोध कर रहे हैं.

---विज्ञापन---
First published on: Jan 18, 2026 11:02 AM

End of Article

About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola