Mohsin Naqvi On Situation In Pakistan: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लोगों में बढ़ती नाराजगी पर चिंता जताई है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर लंबे समय से चली आ रही गवर्नेंस से जुड़ी परेशानियां हल नहीं हुईं, तो देश के युवा एकजुट होकर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू कर सकते हैं.
खुद की अपने मुल्क की बुराई
गुरुवार, 31 जुलाई को इस्लामाबाद में पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट में बोलते हुए मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान का मौजूदा प्रशासनिक ढांचा अब देश की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम नहीं है. खबरों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जब तक बड़े स्ट्रकचर रिफॉर्म नहीं किए जाते, तब तक देश कई सालों बाद भी उन्हीं समस्याओं से जूझता रहेगा.
लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन की बात
मोहसिन नकवी ने कहा कि आम नागरिक एक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो न्याय दे, मेरिट के आधार पर अवसर सुनिश्चित करे और रोजगार पैदा करे, न कि सिर्फ शॉर्ट टर्म रिलीफ के उपायों पर निर्भर रहे. उन्होंने जोर दिया कि गवर्नेंस को बेहतर बनाने के लिए सार्थक संस्थागत सुधार जरूरी हैं, जिनमें मजबूत स्थानीय सरकारें और नई प्रशासनिक इकाइयों का गठन शामिल है.
‘कॉकरोच’ आंदोलन का डर
अपने भाषण के दौरान मोहसिन नकवी ने निराश युवाओं का जिक्र करते हुए ‘कॉकरोच’ की मिसाल दी. उन्होंने कहा कि अगर वो एकजुट हो जाएं, तो बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बदलाव ला सकते हैं. उनका ये कमेंट लोगों में बढ़ती नाराजगी और सुधारों के लिए बढ़ते दबाव के बीच आया है.
सेना से नहीं होगा समाधान
बाद में मीडिया से बात करते हुए मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान की चुनौतियों का समाधान सिर्फ मिलिट्री लीडरशिप नहीं कर सकता. चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज आसिम मुनीर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्थायी प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि राजनेता गवर्नेंस से जुड़े सुधारों को लागू करें. उन्होंने कहा कि देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को ठीक किए बिना सेना की कोशिशों का भी सीमित असर ही होगा.
लोकतंत्र की हिमायत
मोहसिन नकवी ने कहा कि आसिम मुनीर ने हमेशा लोकतंत्र को बनाए रखने का समर्थन किया है और राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय हित में मिलकर काम करने के लिए एनकरेज किया है. उन्होंने पीएम शहबाज शरीफ की कड़ी मेहनत की भी तारीफ की और कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय मुद्दों से निपटने में लंबा समय बिताते हैं. हालांकि, नकवी का तर्क था कि ऐसी कोशिशें सिर्फ क्राइसिस मैनेजमेंट तक ही सीमित हैं, जब तक कि उनके साथ गहरे संस्थागत बदलाव न किए जाएं जो पाकिस्तान की आर्थिक, राजनीतिक और गवर्नेंस से जुड़ी चुनौतियों की मूल वजहों को हल कर सकें.
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