फ्लाईदुबई विमान हादसे के दौरान अपनी जान पर खेलकर 180 लोगों की जान बचाने वाले जांबाज इंडियन कैप्टन स्मित मच्छार अब धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं. लेकिन उस वक्त उनकी हालत कितनी गंभीर थी, उसका दर्द सिर्फ वही समझ सकते हैं. को-पायलट ने उनपर जो हमले किए, उसमें उनकी खोपड़ी में सीरियस फ्रैक्चर हुआ था. इस दौरान मच्छार की सिर की हड्डी टूटकर अंदर की तरफ धंस गई थी, जिसे मेडिकल भाषा में डिप्रेस्ड स्कल फ्रैक्चर कहते हैं.
मच्छार की हुई इमरजेंसी सर्जरी
हादसे के बाद फ्लाईदुबई फ्लाइट की सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई, जहां से कैप्टन स्मित मच्छार को घायल हालत में अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टर्स ने बिना देरी किए उनकी सिर की इमरजेंसी सर्जरी करते हुए हड्डी को ठीक किया. मच्छार के हाथ-पैर, छाती और पेट के ऊपरी हिस्से पर भी काफी चोट लगीं थीं. सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब में सर्जरी के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए आबू धाबी के मिलिट्री हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया, जहां वो एक्पर्ट्स के निगरानी में हैं.
घायल हालत में खोला कॉकपिट का दरवाजा
इस ऑपरेशन का सबसे खौफनाक हिस्सा था जब फ्लाइट के कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए हैंडल को घुमाना था. स्मित मच्छार को उनके को-पायलट ने कुल्हाड़ी ने घायल कर दिया था, जिसके बाद वो घायल हालत में घिसटते हुए कॉकपिट तक पहुंचे और जैसे-तैसे दरवाजा खोल दिया. मच्छार ने बताया कि उन्हें हमले में घायल होने के बाद एहसास हुआ कि विमान तेजी से नीचे जा रहा था. उन्होंने कहा कि वो एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे, लेकिन को-पायलट ने उसे फिर से बंद कर दिया, जिससे वो कॉकपिट के फर्श पर ही रह गए. उन्हें विमान की आवाज और लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी. कैप्टन स्मित ने आगे कहा, ”मैंने पूरी ताकत लगा दी और दरवाजे की तरफ बढ़कर उसे खोल दिया और कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया.”