ईरान के खिलाफ US-इजरायल की जंग को एक महीना पूरा, युद्ध में अब तक कितने रुपये हो गए 'स्वाहा'?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर आगे हमले 10 दिनों के लिए टाल दिए. उन्होंने कहा, शांति वार्ता ‘बहुत अच्छी चल रही है.’ लेकिन ईरान ने प्रस्तावों को ‘एकतरफा और अनुचित’ बताकर ठुकरा दिया.

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अमेरिका और इजरायल की जोड़ी ने सोचा था कि ईरान पर हवाई हमलों की छोटी-सी मुहिम से वहां की टॉप लीडरशिप को खत्म कर एक मुस्लिम देश में पश्चिम समर्थक सरकार की राह आसान की जा सकेगी. हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ युद्ध के एक महीना गुजरने के बाद मामला उलझ चुका है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई समेत कई सीनियर सैन्य और खुफिया अधिकारी मारे जाने के बावजूद तेहरान ने घुटने नहीं टेके हैं.

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कैसे शुरू हुआ यह सिलसिला?


28 फरवरी को वाशिंगटन और तेल अवीव ने संयुक्त रूप से तेहरान, मिनाब सहित कई शहरों पर हवाई हमले बोले जो आज भी जारी हैं. ईरानी आंकड़ों के मुताबिक अब तक इन हमलों में करीब 1900 लोग मारे गए, जिनमें 175 स्कूली लड़कियां शामिल हैं. वहीं, 32 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हालिया ब्रिफिंग में दावा किया कि ईरान में 10000 से अधिक टार्गेट नष्ट किए गए, जिनमें भूमिगत सुविधाएं और रक्षा उद्योग की महत्वपूर्ण इमारतें शामिल हैं.

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अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के 150 से ज्यादा नौसैनिक जहाज डुबो दिए गए. ईरान ने जवाब में मिसाइलें और ड्रोन दागे. इजरायल के अलावा कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और जॉर्डन पर हमले हुए. अबू धाबी में मलबे गिरने से दो लोग मारे गए, जबकि कुवैत के शुवैख पोर्ट को सीधा नुकसान पहुंचा.

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नुकसान का आंकड़ा डराने वाला


द इंडिपेंडेंट के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक 12 से ज्यादा देशों में 4,500 से अधिक मौतें हुई हैं, जिनमें ईरान में 1900 लोगों ने जान गंवाई. ईरानी मीडिया ने बताया कि दो बड़े स्टील प्लांट क्षतिग्रस्त हुए और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख स्थल निशाना बने. पूर्व पेंटागन अधिकारी एलेन मैकस्कर का अनुमान है कि पहले तीन सप्ताह में अमेरिका को युद्ध क्षति और नुकसान की भरपाई में 1.4 से 2.9 अरब डॉलर (लगभग 27,510 करोड़ रुपये) का खर्च आया. लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह झड़पों से 1,100 से ज्यादा मौतें हुईं और लाखों विस्थापित हुए.

आर्थिक मोर्चे पर ईरान की चोट


भारी बमबारी के बावजूद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पकड़ मजबूत कर ली, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत मार्ग है. प्रतिद्वंद्वी देशों से जुड़े जहाजों को रोककर उसने तेल की कीमतें आसमान छूने पर मजबूर कर दिया.

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अभी स्थिति कैसी?


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर आगे हमले 10 दिनों के लिए टाल दिए. उन्होंने कहा, शांति वार्ता ‘बहुत अच्छी चल रही है.’ लेकिन ईरान ने प्रस्तावों को ‘एकतरफा और अनुचित’ बताकर ठुकरा दिया. तेहरान की शर्तें अटल हैं- होर्मुज पर संप्रभुता और युद्ध क्षतिपूर्ति. इजरायल के रक्षा मंत्री ने साफ कहा, ईरान पर हमलों में कोई ढील नहीं दी जाएगी.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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