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दुनिया

US-ईरान वार्ता से पहले इस्लामाबाद सील , रेड जोन में स्कूल-दफ्तर सब बंद

अमेरिका-ईरान की बातचीत शुरू होने से पहले ही फेल! ईरान के इनकार के बावजूद इस्लामाबाद को छावनी बनाकर लगा दिया गया सख्त 'लॉकडाउन'. स्कूल-दफ्तर बंद और लोग घरों में कैद, जानिए आखिर क्यों बिना मेहमानों के ही पाकिस्तान ने राजधानी को बना दिया 'रेड जोन'

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Edited By : Vijay Jain Updated: Apr 20, 2026 13:54
US Iran Talks, Islamabad Red Zone, Pakistan Lockdown, Shehbaz Sharif, Middle East Crisis

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इन दिनों अजीबोगरीब हालात बने हुए हैं. एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार ने पूरे शहर को किसी जंग के मैदान की तरह सील कर दिया है. हालात यह हैं कि ईरान ने साफ कह दिया है कि वह अमेरिका के साथ किसी मेज पर नहीं बैठेगा, लेकिन इसके बावजूद इस्लामाबाद को ‘रेड जोन’ घोषित कर आम जनता के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी गई हैं.

मेहमान गायब, फिर भी शहर ‘लॉक’

कूटनीति के गलियारों में इसे पाकिस्तान की बड़ी नाकामी के तौर पर देखा जा रहा है. ईरान ने दोटूक लहजे में पाकिस्तान की मेजबानी में होने वाली किसी भी चर्चा का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है. कायदे से इस इनकार के बाद तैयारियां रुक जानी चाहिए थीं, लेकिन शहबाज सरकार ने राजधानी को छावनी में तब्दील कर दिया है. शहर की सड़कों पर कंटेनर लगा दिए गए हैं और भारी सुरक्षा बल तैनात है. जनता का सवाल है कि जब मुख्य मेहमान ही नहीं आ रहा, तो फिर ये पहरा किसके लिए है?

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दफ्तरों पर ताले, स्कूल-कॉलेज बंद

आज यानी 20 अप्रैल को इस्लामाबाद के रेड जोन का नजारा किसी डरावने सन्नाटे जैसा है. सभी सरकारी मंत्रालयों और दफ्तरों को बंद कर कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ दे दिया गया है. सिर्फ इतना ही नहीं, बच्चों की पढ़ाई पर भी ब्रेक लगा दिया गया है और सभी स्कूल-कॉलेज बंद हैं. सड़कों पर गाड़ियों की जगह सिर्फ सुरक्षाकर्मी नजर आ रहे हैं. सरकार इसे ‘सुरक्षा प्रोटोकॉल’ बता रही है, लेकिन हकीकत में यह पाकिस्तान की उस छटपटाहट को दिखाता है जिसमें वह वैश्विक मंच पर अपनी साख बचाने की नाकाम कोशिश कर रहा है.

साख बचाने की कोशिश पड़ी भारी

28 फरवरी से जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के तनाव ने वैश्विक स्तर पर तेल और ऊर्जा का संकट पैदा कर दिया है. पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह इस विवाद में मध्यस्थ बनकर अपनी डूबती अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि को सुधार लेगा. लेकिन फिलहाल पाकिस्तान का यह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है. बातचीत की मेज खाली पड़ी है और इस्लामाबाद की जनता बिना किसी वजह के ‘लॉकडाउन’ जैसी पाबंदियों में पिसने को मजबूर है. कुल मिलाकर, पाकिस्तान ने बिसात तो बिछाई लेकिन खिलाड़ी ही मैदान छोड़ गए.

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First published on: Apr 20, 2026 01:54 PM

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