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दुनिया

‘ट्रंप पहले भी गलत थे, आज भी…, US प्रेसिडेंट की ईरान नीति पर भड़के अमेरिका के पूर्व NSA

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति और ईरान के प्रति उनके रुख की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "अस्पष्ट" करार दिया है. बोल्टन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देशों में सैन्य हलचल तेज है और तेल की कीमतों पर असर दिखने लगा है.

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Edited By : Vijay Jain Updated: Mar 13, 2026 11:02
John Bolton vs Trump

ईरान के साथ चल रही जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति पर पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने जमकर आलोचना की है. बोल्टन ने क्लैश रिपोर्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप ने ईरान युद्ध की स्थिति का पूरी तरह गलत आकलन किया. उन्हें शायद लगा कि अमेरिका जल्दी से ईरान में रिजीम चेंज करवा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे वेनेजुएला में कोशिश की गई थी, लेकिन बोल्टन का साफ कहना है कि ‘अगर ट्रंप ने ऐसा सोचा, तो वह पहले भी गलत थे और आज भी गलत हैं.’ उन्होंने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन की ओर से दिए जा रहे विरोधाभासी बयानों से ईरान को यह संदेश जा रहा है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई से हिचकिचा रहा है.

बिना किसी ठोस योजना के लेते हैं फैसले

बोल्टन का मानना है कि व्हाइट हाउस के पास ईरान के खिलाफ कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है. ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाते हुए बोल्टन कहा कि राष्ट्रपति अक्सर बड़े फैसले बिना किसी ठोस योजना या रणनीति के लेते हैं. उनके फैसले अचानक और आवेग में लिए जाते हैं, जबकि सैन्य अभियान जैसे महत्वपूर्ण कदमों के लिए विस्तृत तैयारी, रणनीतिक सोच और लंबी योजना जरूरी होती है. ट्रंप आमतौर पर ऐसी तैयारी नहीं करते. हालांकि बोल्टन ने ट्रंप की नीति की आलोचना के साथ-साथ अमेरिकी सेना की कार्रवाई की भी सराहना की. बोल्टन और ट्रंप के बीच लंबे समय से नीतिगत मतभेद रहे हैं, जो अब खुलकर सामने आ रहे हैं.

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नेतन्याहू का नाम लेकर भी खुलासा

बोल्टन ने साफ किया कि इस युद्ध में अमेरिका को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नहीं धकेला. यह फैसला पूरी तरह ट्रंप का अपना था. युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के सैन्य एवं परमाणु ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से पलटवार किया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया और यह हाल के वर्षों का सबसे खतरनाक संघर्ष बन गया. सैन्य अभियानों से ईरान की कई महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताएं कमजोर हो चुकी हैं और उसके कमांड एवं कम्युनिकेशन सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है.

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First published on: Mar 13, 2026 11:02 AM

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