अमेरिका और ईरान के बीच जंग गहराने के बादल मंडरा रहे हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप "एक सभ्यता खत्म" करने की बात कर रहे हैं, तो इतिहास के पन्ने कुछ और ही गवाही देते हैं. ईरान का इतिहास सिर्फ युद्धों का नहीं, बल्कि उन साम्राज्यों का है जिन्होंने दुनिया के सबसे शक्तिशाली 'रोमन साम्राज्य' तक की नींद उड़ा दी थी. ईरान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि करीब 4000 साल पुरानी समृद्ध सभ्यता है, जिससे मिडिल ईस्ट के कई देश निकले हैं. रोमन साम्राज्य और ग्रीक हमलों को झेलने वाली यह प्राचीन फारसी विरासत ने हर बार पहले से अधिक मजबूती के साथ वापसी की है. 2000 ईसा पूर्व से शुरू होकर यह सभ्यता मध्य एशिया से आए मेदियन (मिडियन) और फारसी कबीलों के बसने के साथ विकसित हुई.
इनकी जड़ें भारत आने वाले आर्यों से भी जुड़ी मानी जाती हैं. इससे पहले, करीब 3000 ईसा पूर्व ईरानी पठार के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में एलामाइट सभ्यता फली-फूली थी. धीरे-धीरे मेदियों और फारसियों ने अलग-अलग साम्राज्यों का रूप लिया. दुनिया के ज्यादातर लोग इस क्षेत्र को लंबे समय तक फारस के नाम से जानते थे.
दुनिया का सबसे बड़ा फारसी साम्राज्य
ईरान हिस्ट्री का सबसे चमकदार अध्याय हखामनी साम्राज्य है, जिसकी नींव महान साइरस द्वितीय ने लगभग 550 ईसा पूर्व रखी. उन्होंने इसे इतिहास के सबसे विशाल साम्राज्यों में से एक बनाया. यह साम्राज्य पश्चिम में यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप से लेकर पूर्व में भारत की सिंधु घाटी तक, दक्षिण में मिस्र और अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था. साइरस को सहिष्णु शासक माना जाता था, जो अपनी प्रजा को अपनी भाषा और धर्म अपनाने की आजादी देते थे. उनका नाम साइरस सिलेंडर पर अमर है. दारियस महान के समय में साम्राज्य चरम पर पहुंचा. उन्होंने सड़कें बनाईं, दुनिया की पहली डाक सेवा विकसित की और अफ्रीका-एशिया-यूरोप के बीच परिवहन के नियमित रास्ते बनाए. लेकिन 480 ईसा पूर्व जेरक्सेस प्रथम के ग्रीस पर असफल हमले के बाद पतन शुरू हुआ. अंततः 330 ईसा पूर्व में सिकंदर महान ने इसे हराया.
पार्थियन और सासानियन: जब रोम हार गया
सिकंदर के बाद सेल्यूसिड शासन चला, फिर पार्थियन साम्राज्य उभरा. यह यूफ्रेट्स नदी से सिंधु नदी तक फैला और सिल्क रोड पर नियंत्रण रखता था. पार्थियनों ने 53 ईसा पूर्व कैरे की लड़ाई में रोमन सेनापति क्रैसस को बुरी तरह हराया, रोमन सेना का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया. 224 ईस्वी में सासानियन साम्राज्य ने पार्थियनों को हराया. यह ज्यादा केंद्रीकृत था, फारसी (जोरोस्ट्रियन) धर्म को बढ़ावा दिया और बीजान्टिन साम्राज्य को चुनौती दी. खुसरो द्वितीय जैसे राजाओं के नेतृत्व में यह पूर्व-इस्लामिक ईरान का प्रतीक बना.
इस्लामी युग और आधुनिक ईरान
7वीं शताब्दी में अरब मुस्लिम सेनाओं ने सासानियन साम्राज्य को हराया और इस्लाम यहां फैला. ईरानी संस्कृति ने इस्लाम को नया रूप दिया—इब्न सीना (अविसेना) जैसे विद्वान इसके उदाहरण हैं. बाद में मंगोल आक्रमण, सफवी राजवंश और नादिर शाह (जिन्होंने भारत पर भी हमला किया) का दौर आया. 19वीं सदी में पश्चिमी प्रभाव बढ़ा. 1979 की इस्लामिक क्रांति ने ईरान को पूरी तरह बदल दिया, जिसके बाद से अमेरिका-ईरान संबंध तनावपूर्ण रहे हैं.
ट्रंप की धमकी और ईरान का संकल्प
वर्तमान में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चरम पर है. ट्रंप ने ईरान को मिटाने की धमकी दी है, लेकिन ईरानी जनता मर-मिटने को तैयार दिख रही है. यह सभ्यता सदियों से आक्रमणों का सामना कर चुकी है—ग्रीस, रोम, सिकंदर या मंगोल किसी ने इसे पूरी तरह नहीं मिटाया. ईरान की यह 4000 साल पुरानी विरासत सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक ताकत का प्रतीक है, जो आज भी मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित करती है.
अमेरिका और ईरान के बीच जंग गहराने के बादल मंडरा रहे हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “एक सभ्यता खत्म” करने की बात कर रहे हैं, तो इतिहास के पन्ने कुछ और ही गवाही देते हैं. ईरान का इतिहास सिर्फ युद्धों का नहीं, बल्कि उन साम्राज्यों का है जिन्होंने दुनिया के सबसे शक्तिशाली ‘रोमन साम्राज्य’ तक की नींद उड़ा दी थी. ईरान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि करीब 4000 साल पुरानी समृद्ध सभ्यता है, जिससे मिडिल ईस्ट के कई देश निकले हैं. रोमन साम्राज्य और ग्रीक हमलों को झेलने वाली यह प्राचीन फारसी विरासत ने हर बार पहले से अधिक मजबूती के साथ वापसी की है. 2000 ईसा पूर्व से शुरू होकर यह सभ्यता मध्य एशिया से आए मेदियन (मिडियन) और फारसी कबीलों के बसने के साथ विकसित हुई.
इनकी जड़ें भारत आने वाले आर्यों से भी जुड़ी मानी जाती हैं. इससे पहले, करीब 3000 ईसा पूर्व ईरानी पठार के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में एलामाइट सभ्यता फली-फूली थी. धीरे-धीरे मेदियों और फारसियों ने अलग-अलग साम्राज्यों का रूप लिया. दुनिया के ज्यादातर लोग इस क्षेत्र को लंबे समय तक फारस के नाम से जानते थे.
दुनिया का सबसे बड़ा फारसी साम्राज्य
ईरान हिस्ट्री का सबसे चमकदार अध्याय हखामनी साम्राज्य है, जिसकी नींव महान साइरस द्वितीय ने लगभग 550 ईसा पूर्व रखी. उन्होंने इसे इतिहास के सबसे विशाल साम्राज्यों में से एक बनाया. यह साम्राज्य पश्चिम में यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप से लेकर पूर्व में भारत की सिंधु घाटी तक, दक्षिण में मिस्र और अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था. साइरस को सहिष्णु शासक माना जाता था, जो अपनी प्रजा को अपनी भाषा और धर्म अपनाने की आजादी देते थे. उनका नाम साइरस सिलेंडर पर अमर है. दारियस महान के समय में साम्राज्य चरम पर पहुंचा. उन्होंने सड़कें बनाईं, दुनिया की पहली डाक सेवा विकसित की और अफ्रीका-एशिया-यूरोप के बीच परिवहन के नियमित रास्ते बनाए. लेकिन 480 ईसा पूर्व जेरक्सेस प्रथम के ग्रीस पर असफल हमले के बाद पतन शुरू हुआ. अंततः 330 ईसा पूर्व में सिकंदर महान ने इसे हराया.
पार्थियन और सासानियन: जब रोम हार गया
सिकंदर के बाद सेल्यूसिड शासन चला, फिर पार्थियन साम्राज्य उभरा. यह यूफ्रेट्स नदी से सिंधु नदी तक फैला और सिल्क रोड पर नियंत्रण रखता था. पार्थियनों ने 53 ईसा पूर्व कैरे की लड़ाई में रोमन सेनापति क्रैसस को बुरी तरह हराया, रोमन सेना का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया. 224 ईस्वी में सासानियन साम्राज्य ने पार्थियनों को हराया. यह ज्यादा केंद्रीकृत था, फारसी (जोरोस्ट्रियन) धर्म को बढ़ावा दिया और बीजान्टिन साम्राज्य को चुनौती दी. खुसरो द्वितीय जैसे राजाओं के नेतृत्व में यह पूर्व-इस्लामिक ईरान का प्रतीक बना.
इस्लामी युग और आधुनिक ईरान
7वीं शताब्दी में अरब मुस्लिम सेनाओं ने सासानियन साम्राज्य को हराया और इस्लाम यहां फैला. ईरानी संस्कृति ने इस्लाम को नया रूप दिया—इब्न सीना (अविसेना) जैसे विद्वान इसके उदाहरण हैं. बाद में मंगोल आक्रमण, सफवी राजवंश और नादिर शाह (जिन्होंने भारत पर भी हमला किया) का दौर आया. 19वीं सदी में पश्चिमी प्रभाव बढ़ा. 1979 की इस्लामिक क्रांति ने ईरान को पूरी तरह बदल दिया, जिसके बाद से अमेरिका-ईरान संबंध तनावपूर्ण रहे हैं.
ट्रंप की धमकी और ईरान का संकल्प
वर्तमान में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चरम पर है. ट्रंप ने ईरान को मिटाने की धमकी दी है, लेकिन ईरानी जनता मर-मिटने को तैयार दिख रही है. यह सभ्यता सदियों से आक्रमणों का सामना कर चुकी है—ग्रीस, रोम, सिकंदर या मंगोल किसी ने इसे पूरी तरह नहीं मिटाया. ईरान की यह 4000 साल पुरानी विरासत सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक ताकत का प्रतीक है, जो आज भी मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित करती है.