---विज्ञापन---

ईरान पर अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों से भारत पर क्या होगा असर? व्यापार और चाबहार को लेकर बढ़ी चिंता

अमेरिका के ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर बढ़ते दबाव के बीच भारत के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है. व्यापार में गिरावट के बावजूद चाबहार बंदरगाह और रणनीतिक हितों के चलते भारत के लिए तेहरान अहम साझेदार बना हुआ है.

---विज्ञापन---

ईरान के खिलाफ अमेरिका की बढ़ती आर्थिक सख्ती ने भारत के सामने एक नई कूटनीतिक और कारोबारी चुनौती खड़ी कर दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी दी है. इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत और तेहरान के बीच व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग भी जुड़ा हुआ है.

भारत और ईरान के बीच व्यापार हुआ कम

हालांकि भारत और ईरान के बीच व्यापार पहले के मुकाबले काफी कम हो चुका है. 2018-19 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 17 अरब डॉलर था, लेकिन 2025-26 तक यह घटकर लगभग 1.63 अरब डॉलर रह गया. मौजूदा व्यापार का बड़ा हिस्सा मानवीय जरूरतों से जुड़े सामान पर केंद्रित है. अमेरिकी प्रतिबंधों, भुगतान और परिवहन से जुड़ी मुश्किलों ने पहले ही कारोबार को प्रभावित किया है.

---विज्ञापन---

भारतीय निर्यातकों की बढ़ सकती है मुश्किल

ईरान भारतीय बासमती चावल, चाय, दवाइयों, चीनी, फलों और मसालों के लिए अहम बाजार रहा है. हालिया अमेरिकी प्रतिबंधों और यूएई के जरिए होने वाले वित्तीय लेनदेन में आई रुकावट से इन उत्पादों के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है. खास तौर पर चावल और चाय के कारोबारियों को भुगतान, बीमा, शिपिंग और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ सकता है.

भारत के लिए चिंता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है. चाबहार बंदरगाह भारत की रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके जरिए भारत को ईरान के रास्ते अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने का विकल्प मिलता है. ऐसे में अमेरिकी दबाव बढ़ने पर इस परियोजना से जुड़े भारतीय हितों को भी सावधानी से आगे बढ़ाना होगा.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें- डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की 4 कंपनियों पर लगाए प्रतिबंध, ईरान से क्रूड ऑयल और पेट्रोकेमिकल की डील करने की सजा

अमेरिका के साथ रिश्तों का भी सवाल

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखने की भी है. एक ओर अमेरिका भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार है, तो दूसरी ओर ईरान के साथ भारत के पुराने ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क संबंध हैं. अमेरिका अब ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर भी दबाव बढ़ा रहा है और हाल में भारत स्थित कुछ कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंधों की चपेट में आई हैं.

---विज्ञापन---

---विज्ञापन---

First published on: Aug 26, 2026 09:45 AM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola