अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिर से 100 प्रतिशत टैरिफ का बम फोड़ सकते हैं, क्योंकि उन्हें रूस-ईरान समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. दरअसल, अमेरिकी कांग्रेस ने लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस और ईरान अधिनियम 2026 बिल पास हो गया है. अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बिल के पक्ष में 262 वोट पड़े, वहीं इसके विरोध में 159 वोट डाले गए. हाउस में पास होने के बाद बिल राष्ट्रपति ट्रंप की डेस्क पर पहुंच गया है, जिस पर आने वाले दिनों में उनके हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. साइन होते ही बिल लागू हो जाएगा, जिससे रूस, भारत, चीन, ईरान पर टैरिफ लग सकता है. टैरिफ लगने से इन देशों के लोगों को महंगाई का झटका लग सकता है.
मीडिया बीफ्रिंग में कई गई बिल पास की घोषणा
लिंडसे ओ ग्राहम के द्वारा प्रस्तावित रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 पास होने की घोषणा मीडिया ब्रीफिंग में अमेरिकी कांग्रेसी माइकल मैककॉल ने की. उन्होंने कहा कि मुझे घोषणा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि बिल 262 के मुकाबले 159 मतों से पारित हो गया है. यह बिल रूस की युद्ध मशीन को पंगु बना देगा और रूसी राष्ट्रपति पुतिन को बातचीत की मेज पर ले आएगा. यह बिल सुनिश्चित करेगा कि अमेरिका के विरोधी रूस, चीन और ईरान अपने आक्रामक अभियान के लिए दंडित हों. लिंडसे ने कहा था कि मैं आज जितना श्योर हूं, उतना पहले कभी नहीं था कि हमारे पास रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का फॉर्मूला है और मैं उनके इस बयान से पूरी तरह सहमत हूं.
अमेरिका का बिल पास करने का मकसद क्या?
रिपब्लिकन कांग्रेसी माइकल मैककॉल ने बताया कि उन्होंने ही हाउस में इस बिल को पेश किया था, जिसका मकसद रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए जरूरी आर्थिक संसाधनों को लेकर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, ताकि वे युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत की टेबल पर आने के लिए मजबूर हो जाएंगे. इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों पर 100% टैरिफ लगाने की परमिशन मिल गई है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं और इन देशों में भारत भी शामिल है. साउथ कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम का नाम इस बिल को दिया गया है. ग्राहम ने ही इस बिल का ड्राफ्ट और प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें उन्हें एक साल से ज्यादा का समय लगा था.
रूस के इन खरीदारों पर टैरिफ लगा सकते ट्रंप
बिल पास करके अमेरिकी सरकार ने रूस की एनर्जी सप्लाई करने वाले अधिकारियों, बैंकों ओर ‘शैडो फ्लीट’ के टैंकरों को टारगेट किया है. रूस का कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले 5 सबसे बड़े आयातकों पर राष्ट्रपति ट्रंप 100% टैरिफ लगाने का निर्देश दे सकते हैं. हालांकि रूस की प्राकृतिक गैस को 15% से कम आयात करने वाले देशों को टैरिफ से छूट मिलेगी, लेकिन भारत-चीन समेत 5 देश इसके दायरे में आएंगे. लेकिन डेमोक्रेट्स ने बिल का विरोध जताया है और डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स ने इसके विरोध में तर्क दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले से ही टैरिफ लगा दुनियाभर के कई देशों के अमेरिका का दुश्मन बना चुके हैं, क्योंकि टैरिफ का नुकसान अमेरिका को भी झेलना पड़ा.
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बिल पास होने से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
बता दें कि 100 प्रतिशत टैरिफ लगने से भारत को बड़ा ट्रेड शॉक लगेगा. वहीं भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा संबंधों में अनिश्चितता आ जाएगी. यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार भारत बना है, ऐसे में रूस के साथ तेल व्यापार की सजा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत को देना चाहते हैं, यानी वे रूस के साथ भारत के संबंध खराब करना चाहत हैं. हालांकि बिल सीधे भारत पर कोई नया टैरिफ नहीं लगाता, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा. हाउस से पास होने के बाद बिल राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाएगा. अगर वे इस पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो कानून बन जाएगा, जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप रूस के तेल और गैस खरीदारों पर सेकेंडरी टैरिफ लगा सकते हैं.