Sanjeev Trivedi
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मिडिल ईस्ट जंग का आज 22वां दिन है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत कई प्रमुख नेता और अधिकारियों को मार दिया। बावजूद इसके ईरान अभी तक अमेरिका और इजरायल का मुकाबला कर रहा है। हालांकि अमेरिका अपनी जीत का दावा कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान के कई ठिकाने तबाह किए, यह अमेरिका की नजर में जीत है लेकिन वही अमेरिका हार्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर यू-टर्न ले गया। अमेरिका ने ईरान के तेल पर 40 साल से बैन को हटा दिया है। ईरान का होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दांव उसे जीत की ओर ले जा रहा है।
अमेरिका ईरान के तेल से प्रतिबंध हटाकर जिसे बुद्धिमानी समझ रहा है, वही बात ईरान को इस युद्ध का विजेता बना रही है। इस युद्ध को ऐसे समझा जा रहा है कि ईरान में regime change तो हुआ नहीं लेकिन रूस और ईरान से प्रतिबंध हटाने को खुद अमेरिका मजबूर हो गया। बता दें कि साल 2019 तक भारत कच्चे तेल की एक बड़ी खेप ईरान से आयात करता था। न केवल ये आयात दूसरों के मुकाबले सस्ता था बल्कि हमारी सभी रिफाइनरी के लिए उपयुक्त भी था। लेकिन 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए जिसकी वजह से भारत को ईरान से आयात बंद करना पड़ा।
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ईरान से भारत रुपये में खरीददारी किया करता था, क्योंकि तेल बेचने के एवज में भारत से ईरान बड़ी मात्रा में अपनी जरूरत की चीजें आयात करता था। इस तरह दोनों देशों के व्यापार में डॉलर की कोई भूमिका नहीं थी। हमारा Forex Reserve मजबूत हो रहा था। लेकिन अमेरिका ने पहले इस व्यवस्था को डिस्टर्ब किया।
भारत को ईरान से धीरे धीरे दूर किया और ईरान को चीन की तरफ धकेल दिया। अब ईरान कह रहा है उसके पास दुनिया के लिए तेल नहीं है। अमेरिका का ईरानी तेल से बैन हटाने का सबसे ज्यादा लाभ में चीन को ह। ईरान का 90% तेल वहां जा रहा है। ट्रेड भी यूआन में हो रहा है।
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