मिडिल ईस्ट में हालात सीजफायर के बाद भी ठीक नहीं हैं। ईरान ने अभी तक हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला है। इधर अमेरिका ने हॉर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंद कर दी। इस पर चीन, ईरान, यमन और रूस ने अमेरिका को धमकी दी है। हॉर्मुज स्ट्रेट से सबसे ज्यादा कच्चा तेल चीन को सप्लाई होता है। वहीं दुनिया का 20 से 22 प्रतिशत इसी रूट से निकलता है।
चीन इसे खुलवाने के लिए हर प्रयास कर रहा है। अब हॉर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक होने से चीन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है। अगर चीन और अमेरिका समंदर में आमने सामने आते हैं तो किसका पलड़ा भारी होगा? विस्तार से समझते हैं।
बता दें कि वर्तमान में चीन के पास जहाजों की संख्या (841+) के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है। ग्लोबल पावर इंडेक्स 2026 के अनुसार अमेरिका अपनी 11 विमानवाहक पोतों (aircraft carriers) और परमाणु पनडुब्बियों के साथ अभी भी अधिक घातक और तकनीकी रूप से उन्नत नौसेना है।
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चीन की नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी है, जिसमें 841 युद्धपोत हैं। यह संख्या अमेरिका (465) और रूस (747) से ज्यादा है। चीन ने तेजी से पनडुब्बियां, डेस्ट्रॉयर और फ्रिगेट बनाए हैं, और उसके पास 3 एयरक्राफ्ट कैरियर और 4 हेलीकॉप्टर कैरियर हैं
चीन की नौसेना में 61 पनडुब्बियां हैं, जिनमें कुछ परमाणु ऊर्जा से चलने वाली भी हैं। इसके अलावा 53 डेस्ट्रॉयर, 46 फ्रिगेट और 50 कॉर्वेट हैं। नौसेना में 2.5 लाख से ज्यादा नाविक हैं। चीन की नौसेना एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत है। चीन की नौसेना दक्षिण चीन सागर में मजबूत है, लेकिन ग्लोबल स्तर पर युद्ध लड़ने की क्षमता अभी भी सीमित है क्योंकि उसके पास अमेरिका जैसे बड़े कैरियर स्ट्राइक ग्रुप नहीं हैं।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2026 के अनुसार, चीन संख्या में आगे है, लेकिन क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल पहुंच में अमेरिका अभी भी मजबूत है। अमेरिका की नौसेना के 465 युद्धपोतों का कुल टनेज 82 लाख टन है, जबकि चीन का 31 लाख टन है।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2026 के अनुसार, चीन की नौसेना संख्या में आगे है, लेकिन क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल पहुंच में अमेरिका अभी भी मजबूत है। अमेरिका की नौसेना के पास 465 युद्धपोत हैं, जिनका कुल टनेज 82 लाख टन से ज्यादा है, जबकि चीन का सिर्फ 31 लाख टन है। चीन की नौसेना में 841 युद्धपोत हैं, जबकि अमेरिका के पास 465 हैं। हालांकि, अमेरिका की नौसेना में अधिक आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत युद्धपोत हैं, जैसे कि 11 एयरक्राफ्ट कैरियर, जबकि चीन के पास 3 हैं।
अमेरिका की नौसेना दुनिया में सबसे मजबूत है, उसके पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर और 9 हेलीकॉप्टर कैरियर हैं। 66 पनडुब्बियों में से ज्यादातर परमाणु ऊर्जा वाली हैं, जिनमें 50 से ज्यादा परमाणु पनडुब्बियां हैं। अमेरिका के पास 83 डेस्ट्रॉयर और 3 लाख से ज्यादा नौसैनिक हैं।चीन संख्या में आगे है, लेकिन अमेरिका की नौसेना की क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और अनुभव ज्यादा है। अमेरिका के जहाज ज्यादा आधुनिक और ताकतवर हैं, और पूरी दुनिया में कहीं भी लड़ने लायक हैं।
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मिडिल ईस्ट में हालात सीजफायर के बाद भी ठीक नहीं हैं। ईरान ने अभी तक हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला है। इधर अमेरिका ने हॉर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंद कर दी। इस पर चीन, ईरान, यमन और रूस ने अमेरिका को धमकी दी है। हॉर्मुज स्ट्रेट से सबसे ज्यादा कच्चा तेल चीन को सप्लाई होता है। वहीं दुनिया का 20 से 22 प्रतिशत इसी रूट से निकलता है।
चीन इसे खुलवाने के लिए हर प्रयास कर रहा है। अब हॉर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक होने से चीन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है। अगर चीन और अमेरिका समंदर में आमने सामने आते हैं तो किसका पलड़ा भारी होगा? विस्तार से समझते हैं।
बता दें कि वर्तमान में चीन के पास जहाजों की संख्या (841+) के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है। ग्लोबल पावर इंडेक्स 2026 के अनुसार अमेरिका अपनी 11 विमानवाहक पोतों (aircraft carriers) और परमाणु पनडुब्बियों के साथ अभी भी अधिक घातक और तकनीकी रूप से उन्नत नौसेना है।
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चीन की नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी है, जिसमें 841 युद्धपोत हैं। यह संख्या अमेरिका (465) और रूस (747) से ज्यादा है। चीन ने तेजी से पनडुब्बियां, डेस्ट्रॉयर और फ्रिगेट बनाए हैं, और उसके पास 3 एयरक्राफ्ट कैरियर और 4 हेलीकॉप्टर कैरियर हैं
चीन की नौसेना में 61 पनडुब्बियां हैं, जिनमें कुछ परमाणु ऊर्जा से चलने वाली भी हैं। इसके अलावा 53 डेस्ट्रॉयर, 46 फ्रिगेट और 50 कॉर्वेट हैं। नौसेना में 2.5 लाख से ज्यादा नाविक हैं। चीन की नौसेना एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत है। चीन की नौसेना दक्षिण चीन सागर में मजबूत है, लेकिन ग्लोबल स्तर पर युद्ध लड़ने की क्षमता अभी भी सीमित है क्योंकि उसके पास अमेरिका जैसे बड़े कैरियर स्ट्राइक ग्रुप नहीं हैं।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2026 के अनुसार, चीन संख्या में आगे है, लेकिन क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल पहुंच में अमेरिका अभी भी मजबूत है। अमेरिका की नौसेना के 465 युद्धपोतों का कुल टनेज 82 लाख टन है, जबकि चीन का 31 लाख टन है।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2026 के अनुसार, चीन की नौसेना संख्या में आगे है, लेकिन क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल पहुंच में अमेरिका अभी भी मजबूत है। अमेरिका की नौसेना के पास 465 युद्धपोत हैं, जिनका कुल टनेज 82 लाख टन से ज्यादा है, जबकि चीन का सिर्फ 31 लाख टन है। चीन की नौसेना में 841 युद्धपोत हैं, जबकि अमेरिका के पास 465 हैं। हालांकि, अमेरिका की नौसेना में अधिक आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत युद्धपोत हैं, जैसे कि 11 एयरक्राफ्ट कैरियर, जबकि चीन के पास 3 हैं।
अमेरिका की नौसेना दुनिया में सबसे मजबूत है, उसके पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर और 9 हेलीकॉप्टर कैरियर हैं। 66 पनडुब्बियों में से ज्यादातर परमाणु ऊर्जा वाली हैं, जिनमें 50 से ज्यादा परमाणु पनडुब्बियां हैं। अमेरिका के पास 83 डेस्ट्रॉयर और 3 लाख से ज्यादा नौसैनिक हैं।चीन संख्या में आगे है, लेकिन अमेरिका की नौसेना की क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और अनुभव ज्यादा है। अमेरिका के जहाज ज्यादा आधुनिक और ताकतवर हैं, और पूरी दुनिया में कहीं भी लड़ने लायक हैं।
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