---विज्ञापन---

दुनिया

Explainer: किन-किन देशों के तेल के कुएं पर है अमेरिका का कब्जा? जानें यहां

ईरान युद्ध के बीच दुनिया भर में तेल संकट गहरा गया है. क्या आप जानते हैं कि सीरिया और इराक जैसे कई देशों के तेल कुओं पर अमेरिका का सीधा या परोक्ष कब्जा है?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने तेल और गैस का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. पिछले एक महीने से जारी इस संघर्ष की वजह से वैश्विक बाजार में तेल की कमी महसूस की जा रही है और महंगाई तेजी से बढ़ रही है. अक्सर यह सवाल उठता है कि अमेरिका हमेशा उन देशों पर अपनी पैनी नजर क्यों रखता है जहां तेल के विशाल भंडार मौजूद हैं. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तेल सिर्फ ईंधन नहीं बल्कि सत्ता का केंद्र रहा है. व्यावहारिक रूप से कोई भी देश किसी दूसरे की संपत्ति पर सीधा दावा नहीं कर सकता, लेकिन अमेरिका अपनी रणनीतिक और आर्थिक नीतियों के जरिए इन संसाधनों पर नियंत्रण करने का पुराना इतिहास रहा है. आज भी दुनिया के कई देशों के तेल कुओं पर अमेरिका का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव इतना गहरा है कि उसे नजरअंदाज करना नामुमकिन है.

इराक से सीरिया तक अमेरिका का सीधा सैन्य दखल

सीधे नियंत्रण का मतलब है किसी देश में अपनी सेना भेजकर वहां के तेल क्षेत्रों की सुरक्षा या उत्पादन को अपने हाथों में लेना. इसके सबसे बड़े उदाहरण इराक और सीरिया हैं. साल 2003 के इराक युद्ध के बाद अमेरिका ने वहां के बुनियादी ढांचे पर ऐसा प्रभाव डाला कि लंबे समय तक वहां की निर्यात नीतियां वाशिंगटन से तय होती रहीं. वर्तमान में भी सीरिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों वाले इलाके ‘देर-ए-जोर’ में अमेरिकी सेना की मौजूदगी बनी हुई है. हालांकि अमेरिका का तर्क है कि वह इन कुओं को आतंकियों से बचा रहा है, लेकिन सीरिया की सरकार इसे अपनी संपत्ति पर अवैध कब्जा मानती है. इसी तरह लीबिया में गद्दाफी के पतन के बाद से वहां के तेल प्रबंधन में पश्चिमी शक्तियों और अमेरिका का दखल इतना ज्यादा बढ़ गया है कि भारी संसाधनों के बावजूद वहां की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: न सीधी बात, न समझौता! बंकर में कैबिनेट मीटिंग कर ईरान ने दिखाया अपना कड़ा रुख

पेट्रोडॉलर और रणनीतिक गठबंधनों का अदृश्य जाल

अप्रत्यक्ष नियंत्रण सैन्य दखल से कहीं ज्यादा शक्तिशाली और व्यापक होता है जिसके जरिए अमेरिका करीब 20 से 25 प्रमुख तेल उत्पादक देशों को प्रभावित करता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत ‘पेट्रोडॉलर व्यवस्था’ है जिसके तहत वैश्विक तेल का व्यापार केवल अमेरिकी डॉलर में होता है. इसका मतलब है कि किसी भी देश को तेल खरीदने के लिए पहले डॉलर की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका पूरे बाजार का अघोषित मैनेजर बन जाता है. इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देशों के साथ अमेरिका के गहरे रक्षा समझौते हैं. ये देश तेल के मालिक तो हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा के बदले उन्हें अपनी उत्पादन नीतियां अक्सर अमेरिकी हितों के हिसाब से तय करनी पड़ती हैं. साथ ही ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाकर अमेरिका यह तय करता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसका तेल बिकेगा और किसका नहीं.

---विज्ञापन---

समुद्री रास्तों पर पहरा और बदलती वैश्विक तस्वीर

दुनिया का अधिकतर तेल जिन समुद्री रास्तों से गुजरता है उन पर अमेरिकी नौसेना की कड़ी गश्त रहती है. होर्मुज और मलक्का जैसे महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखने वाला देश एक तरह से दुनिया की तेल सप्लाई लाइन का मालिक होता है. हालिया ईरान युद्ध के दौरान जब होर्मुज जलमार्ग पर पहरा बढ़ा तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों ने आसमान छू लिया. हालांकि अब रूस, चीन और भारत जैसे देश अपनी स्थानीय मुद्राओं में तेल का व्यापार करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे अमेरिका की पकड़ थोड़ी ढीली पड़ने लगी है. ब्रिक्स देशों का विस्तार भी पेट्रोडॉलर की बादशाहत को बड़ी चुनौती दे रहा है. फिर भी मौजूदा हालात में वैश्विक तेल सुरक्षा और कीमतों के निर्धारण में अमेरिका की भूमिका सबसे बड़ी बनी हुई है क्योंकि वह उस बाजार का असली मालिक है जहां यह काला सोना बिकता है.

First published on: Mar 31, 2026 10:55 AM

End of Article

About the Author

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में तीन वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. राजा ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Zee Media के डिजिटल प्लेटफॉर्म India.Com हिंदी से की थी. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

Read More

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में तीन वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. राजा ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Zee Media के डिजिटल प्लेटफॉर्म India.Com हिंदी से की थी. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

Read More
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.
Sponsored Links by Taboola