US vs Greenland Denmark: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव बरकरार है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की है, लेकिन मीटिंग का कोई नतीजा ही नहीं निकला है. ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने अमेरिका का हिस्सा बनने से साफ इनकार किया, वहीं डेनमार्क के अधिकारियों ने कहा कि अगर अमेरिका को रूस-चीन से खतरा महसूस हो रहा है तो वे उन्हें संभाल लेंगे.
Denmark says "fundamental disagreement" remains after "frank" White House talks over Greenland.
Greenland's foreign minister said Trump's desire to own their territory is painful for her people and reiterated that Greenland does not want "to be owned by the United States." pic.twitter.com/qIE9o28QJ5---विज्ञापन---— DW News (@dwnews) January 14, 2026
ट्रंप ने ऐसे दिया है दोटूक जवाब
लेकिन सामने से राष्ट्रपति ट्रंप ने दोटूक जवाब देते हुए कहा कि चीन और रूस को संभालना डेनमार्क-ग्रीनलैंड के बस की बात नहीं है. अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की आवश्यकता है, इसलिए हम देखेंगे कि क्या होता है. डेनमार्क के साथ अमेरिका के अच्छे संबंध हैं. अगर अमेरिका हस्तक्षेप नहीं करता है तो रूस और चीन हस्तक्षेप करेंगे. डेनमार्क इस बारे में कुछ नहीं कर सकता, लेकिन अमेरिका इस बारे में सब कुछ कर सकता है.
ट्रंप के बयान पर जताई आपत्ति
दरअसल, ग्रीनलैंड और डेनमार्क के विदेश मंत्री व्हाइट हाउस पहुंचे थे, जहां उनकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात हुई, जिसमें ग्रीनलैंड के भविष्य पर चर्चा हुई. ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका जबरन ग्रीनलैंड को कब्जाना चाहता है, जबकि ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क का हिस्सा है और ग्रीनलैंड को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के बयान उचित नहीं हैं. ग्रीनलैंड को अमेरिका की सदस्यता भी स्वीकार नहीं है.
TRUMP: "If we don't do it, Russia or China will take over Greenland, and we're not going to have Russia or China as a neighbor. Okay?"
— Fox News (@FoxNews) January 9, 2026
"I would like to make a deal the easy way. But if we don't do it the easy way, we're going to do it the hard way."
"I'm a fan of Denmark…but,… pic.twitter.com/xDuqtD4yKT
डेनमार्क और ग्रीनलैंड का सुझाव
मीटिंग के बाद ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट ने बयान दिया कि अमेरिका के साथ परस्पर सहयोग बढ़ा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होगा कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा बनना चाहता है. वहीं डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने कहा कि अमेरिका, डेनमार्क, ग्रीनलैंड ने मिलकर हाईलेवल वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला किया है, जिसका काम ग्रीनलैंड के मुद्दे और भविष्य का सही समाधान निकालकर देना होगा.
ट्रंप ने डेनमार्क को बताया कमजोर
व्हाइट हाउस में मीटिंग के बाद एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति ट्रंप से ग्रीनलैंड और डेनमार्क से मीटिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी के लिहाज से ग्रीनलैंड बेहद जरूरी है. एक तरफ रूस है और दूसरी तरफ चीन है तो डेनमार्क को भी अपनी सिक्योरिटी करनी होगी. अगर रूस और चीन मिलकर या अकेले-अकेले ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहेंगे तो डेनमार्क उसे बचा नहीं पाएगा, लेकिन अमेरिका बचा सकता है.
"The United States needs Greenland for the purpose of National Security… IF WE DON’T, RUSSIA OR CHINA WILL, AND THAT IS NOT GOING TO HAPPEN!" – President Donald J. Trump 🇺🇸 pic.twitter.com/uDfWla0hNU
— The White House (@WhiteHouse) January 14, 2026
गोल्डन डोम के लिए ग्रीनलैंड जरूरी
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका डेनमार्क के भरोसे पर नहीं बैठ सकता. डेनमार्क को पहले अपनी रक्षा करनी होगी, ग्रीनलैंड तो बाद की बात है. अमेरिका के डेनमार्क के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं. अब देखते हैं कि आगे क्या होता है, लेकिन हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है और अमेरिका इसे लेकर रहेगा, क्योंकि ग्रीनलैंड के बिना गोल्डन डोम का अमेरिका का लक्ष्य कभी भी पूरा नहीं हो पाएगा. इसलिए अब ग्रीनलैंड से कम कुछ भी मंजूर नहीं है, समाधान निकालेंगे.










