अमेरिका ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले देशों से वसूले गए टैरिफ के रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है. डोनाल्ड ट्रंप सरकार को करीब 166 अरब डॉलर का टैरिफ लौटाना है, जिसमें से 100 अरब डॉलर का टैरिफ 31 जुलाई तक रिफंड कर दिया गया है. ट्रंप सरकार ने IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ से करीब 130 अरब डॉलर की कमाई की थी. अमेरिका के लिए विदेशों से सामान मंगाने पर यह टैक्स लगाया गया था, लेकिन अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को गैर-कानूनी करार देकर रद्द किया.

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कंपनियों-कारोबारियों के खाते में आने लगा पैसा

सुप्रीम कोर्ट ने मैक्सिको, कनाडा और चीन के सामान पर लगाए गए टैरिफ को खत्म करने का आदेश भी दिया. ट्रंप सरकार को वसूले गए टैरिफ को लौटाने का निर्देश भी दिया. इसी निर्देश पर अमल करते हुए ट्रंप सरकार ने टैरिफ रिफंड करना शुरू कर दिया है और कंपनियों से लेकर छोटे कारोबारियों तक के बैंक अकाउंट में टैरिफ का रिफंड पहुंचने लगा है. कंपनियां ने रिफंड को संजीवनी बताया है, जिसका इस्तेमाल वे अपनी कंपनी की ग्रोथ के लिए करेंगे और इनवेस्टमेंट करके रिफंड कमाएंगी.

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किन कंपनियों को मिल चुका टैरिफ का रिफंड?

बता दें कि कई बड़ी कंपनियों का टैरिफ रिफंड हुआ है. एप्पल कंपनी को करीब 2.2 अरब डॉलर का रिफंड मिला है. अमेजॉन कंपनी को उन देशों में रिफंड मिलेगा, जहां टैरिफ के चलते ग्राहकों से ज्यादा पैसा वसूला गया था. एप्पल कंपनी रिफंड के पैसे का इस्तेमाल नए इन्वेस्टमेंट और मैन्युफैक्चरिंग में करेगी. इनके अलावा वालमार्ट और कॉस्टको को भी रिफंड मिला है, जिसके चलते कंपनियों अपने प्रोडक्ट्स के रेट घटा सकती हैं. ज्यादातर कंपनियां रिफंड से अपने कारोबार को मजबूत कर सकती हैं.

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भारतीय कंपनियों को कैसे-कितना हो फायदा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय कंपनियों को पूरा रिफंड मिल सकता है. इनमें सिएट, बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, CNH इंडिया और गोकलदास एक्सपोर्ट्स जैसी कंपनियां शामिल हैं. हालांकि ट्रंप सरकार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक भारत से टैरिफ नहीं मिला था, लेकिन ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, 166 अरब डॉलर के रिफंड में 10 से 12 अरब डॉलर का सामान टैरिफ लागू रहने के दौरान अमेरिका को सप्लाई किया गया था, जिसमें राहत मिल सकती है.

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