मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ राजधानी दिल्ली में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा, लेकिन इसमें समाजवादी पार्टी की गैर-मौजूदगी ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है. राहुल गांधी की अगुवाई में जंतर-मंतर की ओर निकले विपक्षी सांसदों के इस मार्च और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आयोजित लंच से अखिलेश यादव समेत सपा का एक भी सांसद शामिल नहीं हुआ. सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा की इस दूरी की वजह कांग्रेस द्वारा अपनाई गई रणनीति है. दरअसल, पहले दिन करीब 300 विपक्षी सांसदों ने मार्च निकाला था, जिसके बाद अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था.
कांग्रेस नेताओं पर दर्ज हुई एफआईआर को लेकर जब लखनऊ में पत्रकारों ने अखिलेश यादव से सवाल पूछा तो सपा प्रमुख ने चुटकी लेते हुए साफ शब्दों में कहा, “पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करने के अलावा कोई काम नहीं है.”
हालांकि, बाद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अचानक आकाशवाणी भवन पहुंच गए और वहां देर रात तक धरने पर बैठ गए. सूत्रों के मुताबिक, सहयोगी दलों को केवल सामान्य विरोध प्रदर्शन की जानकारी दी गई थी, अचानक लिए गए इस धरने के फैसले से सहयोगी दल असहज नजर आए.
खरगे के लंच में भी नहीं पहुंचे सपा सांसद
बुधवार को मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली के जनपथ स्थित एक रेस्तरां में विपक्षी सांसदों के लिए लंच रखा था, जिसमें टीएमसी, राजद, लेफ्ट समेत कई दलों के करीब 100 सांसद पहुंचे. इसके बाद वे बसों से जंतर-मंतर के लिए निकले, जहां पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया. हालांकि, इस पूरे कार्यक्रम से सपा के अलावा शिवसेना (UBT) और NCP (शरद पवार) के सांसद भी नदारद रहे. सपा के एक सांसद ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि न्यौता मिला था या नहीं और पार्टी का कोई प्रतिनिधि क्यों नहीं पहुंचा.
लंच में सपा की गैर-मौजूदगी पर अखिलेश यादव ने दिया बड़ा बयान
‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों की लंच बैठक में सपा का कोई भी सांसद शामिल नहीं हुआ. इस गैर-मौजूदगी को लेकर लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने ही अंदाज में पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी. लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “यह सिर्फ एक लंच तक सीमित नहीं रहेगा. भविष्य में आप चाय पर भी किसी बैठक की बात सुन सकते हैं. हम सब एक साथ बैठकर समोसे भी खा सकते हैं अगर ‘समोसा’ का कोई नारा लग जाए, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. कूटनीति चलती रहेगी…” अखिलेश यादव के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि वे गठबंधन में किसी बड़ी दरार की बात को तवज्जो देने के बजाय इसे सामान्य राजनीतिक संवाद और आगे की प्रक्रिया के रूप में देख रहे हैं.
कांग्रेस ने दी सफाई: सब एकजुट हैं
गठबंधन में दरार की खबरों के बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि लंच का फैसला मंगलवार देर रात लिया गया था और इसकी सूचना भी देर से दी गई, इसलिए कुछ दलों के नेता नहीं पहुंच सके. उन्होंने साफ किया कि ‘इंडिया’ गठबंधन में कोई मतभेद नहीं है और सभी दल वोट चोरी व परिसीमन जैसे मुद्दों के खिलाफ पूरी मजबूती के साथ एकजुट हैं.