राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा उलट फेर हुआ है. राज्यसभा चुनाव के लिए यूपी के दो निर्दलीय उम्मीदवारों कंते सयन्ना और ओंकार नाथ चौरसिया का नामांकन रद्द कर दिया है. यानी अब बीजेपी के आठ और समाजवादी पार्टी के दो प्रत्याशी बिना किसी विरोध के राज्यसभा के लिए सांसद चुने जाएंगे. बुधवार को बाकी नामांकन सही पाए जाने के बाद, उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए बीजेपी के आठ और समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाने के लिए तैयार हैं. रिटर्निंग ऑफिसर अजीत वर्मा ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए.
क्यों खारिज हुआ नामांकन?
अधिकारी ने कहा कि बीजेपी के आठ और एसपी के दो उम्मीदवारों के नामांकन पत्र सही पाए गए, जबकि कांटे स्याना और ओंकार नाथ चौरसिया के नामांकन पत्र जरूरी शर्तें पूरी ना करने की वजह से खारिज कर दिए गए. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, इसलिए उच्च सदन के लिए द्विवार्षिक चुनाव जरूरी हो गए हैं. बीजेपी उम्मीदवारों में उत्तर प्रदेश के मंत्री धर्मपाल सिंह, पार्टी की ओबीसी विंग के प्रमुख प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, विद्या सागर सोनकर और प्रियंका रावत, राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडे और राम प्रताप सिंह चौहान शामिल हैं.
समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवार तय
SP के दो उम्मीदवार पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव धनराज परिमल नाथवानी हैं. अब 10 सीटों के लिए ठीक 10 सही उम्मीदवार बचे हैं, इसलिए सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे, बशर्ते 9 अक्टूबर की समय-सीमा से पहले कोई अपना नाम वापस ना ले. हालांकि वोटिंग के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अधिकारियों ने कहा कि अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी. उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में जब सभी 10 सीटों के लिए मुकाबला होता है तो एक उम्मीदवार को सीट पक्की करने के लिए विधायकों के कम से कम 37 ‘फर्स्ट-प्रेफरेंस’ वोट की जरूरत होती है. पहले कुछ लोगों को उम्मीद थी कि एसपी तीसरा उम्मीदवार उतारेगी और 10वीं सीट के लिए मुकाबला करवाएगी. हालांकि, पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को X पर एक पोस्ट में ये कहते हुए अटकलों पर विराम लगा दिया कि ”अब हमारा ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है”