दुनिया में जहां एक तरफ व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है और कई देश आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाने की नीति अपना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चीन ने एक बड़ा कदम उठाया है. चीन ने ऐलान किया है कि वो 1 मई 2026 से अपने साथ राजनयिक संबंध रखने वाले 53 अफ्रीकी देशों के लिए सभी आयात शुल्क (टैरिफ) पूरी तरह खत्म कर देगा. इस फैसले के तहत इन देशों से आने वाले लगभग सभी प्रोडक्ट्स- चाहे वो कृषि, खनन या औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े हों, अब चीन में बिना किसी आयात शुल्क के एंट्री कर सकेंगे. इससे अफ्रीकी देशों के लिए दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना काफी आसान हो जाएगा.
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एक देश को बाहर रखा गया
हालांकि, इस सूची से एक अफ्रीकी देश को बाहर रखा गया है. Eswatini को इस प्लान का फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि उसके ताइवान के साथ राजनयिक संबंध हैं. चीन लंबे समय से ‘वन चाइना पॉलिसी’ का समर्थन करता है और ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. ऐसे में जो देश ताइवान के साथ आधिकारिक संबंध रखते हैं, उन्हें इस तरह की आर्थिक रियायतों से दूर रखा जाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कदम सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है. चीन अफ्रीका में अपने प्रभाव को लगातार बढ़ा रहा है—चाहे वह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स हों, निवेश हो या फिर संसाधनों तक पहुंच. अब टैरिफ हटाने से अफ्रीकी देशों का झुकाव और अधिक चीन की ओर बढ़ सकता है.
चीन-अफ्रीका व्यापार पर असर पड़ेगा
इस फैसले का सीधा असर चीन-अफ्रीका व्यापार पर पड़ेगा. अफ्रीकी देशों के लिए चीन में निर्यात करना सस्ता हो जाएगा, जिससे उनके प्रॉडक्ट्स की मांग बढ़ सकती है. वहीं चीन को भी सस्ता कच्चा माल और संसाधन आसानी से मिल पाएंगे. ग्लोबल लेवल पर इस कदम को अमेरिका की नीतियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जहां हाल ही में टैरिफ को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है. ऐसे में चीन का ये फैसला खुद को एक खुले और सहयोगी व्यापारिक भागीदार के रूप में पेश करने की कोशिश भी माना जा रहा है.










