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ईरान पर अचानक नहीं हुआ था हमला? अमेरिका ने बताया- क्यों लॉन्च हुआ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ी हुई है। गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ऊपर अटैक कर दिया। यह बड़ा हमला था। लेकिन यह हमला अचानक नहीं हुआ था। अमेरिका ने नया दावा किया है, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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Written By: Raghav Tiwari Updated: Mar 4, 2026 09:54

मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ी हुई है। गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ऊपर अटैक कर दिया। यह बड़ा हमला था। लेकिन यह हमला अचानक नहीं हुआ था। अमेरिका का कहना है कि इससे पहले ईरान के साथ 3 राउंड की बातचीत हुई थी। तीनों दौरे की बातचीत फेल होने के बाद हमला किया गया।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तीन दौर की बातचीत हुई थी जो फेल रही। बाद में वाशिंगटन इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि तेहरान अपने संवर्धन महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने के बारे में कभी गंभीर नहीं था और अंतिम बैठक के कुछ ही दिनों के भीतर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू कर दिया।

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दावा है कि कई हफ्तों तक अमेरिकी राजनयिक ईरान के अधिकारियों के साथ बातचीत करते रहे और समझौता करने की कोशिश करते रहे। वे ओमान गए और स्विट्जरलैंड भी गए। उन्होंने प्रलोभन दिए, कुछ सीमाएं तय कीं और बार-बार वापस आते रहे। अंत में, उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यह सब समय की बर्बादी थी और उन्होंने अपने निष्कर्ष राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंप दिए।

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एएनआई सहित पत्रकारों को ईरान पर अमेरिका के नेतृत्व वाले हमले की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देते हुए वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने पत्रकारों को उन तीन दौर की वार्ताओं के दौरान हुई घटनाओं के बारे में विस्तार से बताया और समझाया कि वे क्यों मानते हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के बारे में कभी गंभीर नहीं था।

अधिकारियों ने ओमान और स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के दौरान ईरानी पक्ष की ओर से देरी, धमकियों और झूठे बहाने के एक पैटर्न का वर्णन किया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पहले दौर की शुरुआत एक ऐसी बात से हुई जिसे उन्होंने समझौते के आवरण में धमकी करार दिया। ईरान के प्रमुख वार्ताकार और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह दावा करते हुए शुरुआत की थी कि यूरेनियम संवर्धन उनके देश का अविभाज्य अधिकार है।

First published on: Mar 04, 2026 07:53 AM

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