Vande Bharat Sleeper: वंदेभारत स्लीपर की अगली ट्रेन को लॉन्च करने में क्यों हो रही देरी? सामने आई ये बड़ी वजह

Vande Bharat News: अभी भारत में एक वंदे भारत स्लीपर चलती है, जिसकी सर्विस हावड़ा से कामाख्या के बीच है, लेकिन ऐसी नई ट्रेन को लॉन्च करने में अभी देरी हो रही है, क्योंकि डिजाइन को मंजूरी अभी नहीं मिली है. ऐसे में पैसेंजर्स को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है.

Vande Bharat Sleper

Vande Bharat Sleeper (Photo-X)

मुख्य बिंदु

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  • भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर सर्विस 17 जनवरी 2026 को शुरू हुई.
  • डिजाइन मंजूरी में देरी के कारण 120 स्लीपर ट्रेनों को लॉन्च करने में देरी हुई है.
  • एक जर्मन कंसल्टेंट को अभी फाइनल कोच डिजाइन सब्मिट करने हैं.
  • किनेट को 2026 के आखिर तक अपनी पहली स्लीपर ट्रेन का प्रोटोटाइप मिलने की उम्मीद है.
  • भारतीय रेलवे स्लीपर कोच के प्रोडक्शन को तेज करने के लिए अपनी फैक्टरियों का इस्तेमाल कर सकती है.

Why Vande Bharat Sleeper Train Expansion Delayed: भारत ने 17 जनवरी 2026 को अपनी पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवा शुरू की थी, जो 27575 और 27576 नंबर की ट्रेनों के जरिए कामाख्या और हावड़ा को जोड़ती है. हालांकि, जो पैसेंजर्स इस प्रीमियम ट्रेन के और स्लीपर वर्जन की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें शायद और इंतजार करना पड़े. प्लान के मुताबिक एक्सपैंशन में देरी हुई है क्योंकि नए स्लीपर कोच के फाइनल डिजाइन को अभी मंजूरी नहीं मिली है.

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देरी की वजह

इस देरी का असर काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस (एक इंडो-रशियन जॉइंट वेंचर) को सौंपे गए 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेट के प्रोडक्शन पर पड़ रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी को अभी तक बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने के लिए जरूरी फाइनल डिजाइन पैकेज नहीं मिला है. नतीजतन, भारतीय रेलवे फ्यूचर के स्लीपर कोच के डेवलपमेंट में तेजी लाने के लिए अपनी प्रोडक्शन यूनिट्स का इस्तेमाल करने के विकल्प पर विचार कर रहा है.

सूत्रों ने बताया कि कोच डिजाइन तैयार करने और उन्हें वेरिफाई करने के लिए जिम्मेदार जर्मन इंजीनियरिंग कंसल्टेंट ने अभी तक पूरे और मंजूर किए गए प्लान सब्मिट नहीं किए हैं. इन टेक्निकल मंजूरियों के बिना, प्रोडक्शन अगले स्टेज में नहीं बढ़ सकता, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की समय-सीमा पीछे खिसक रही है.

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2 साल की देरी

काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस ने संकेत दिया है कि अब उसकी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. ये ऑरिजनल शेड्यूल की तुलना में 2 साल से ज्यादा की देरी है. इस रुकावट के बावजूद, कंपनी का कहना है कि प्रोजेक्ट उसकी इंटरनल प्लानिंग के मुताबिक सही रास्ते पर है.

100 से ज्यादा सप्लायर्स

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए, काइनेट ने कहा कि वो अलग-अलग सप्लायर्स के साथ कमर्शियल समझौतों पर कोई कमेट नहीं करती है. कंपनी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में 100 से ज्यादा सप्लायर्स शामिल हैं, जिनमें इंजीनियरिंग, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स का काम करने वाली कंपनियां शामिल हैं.

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आगे बढ़ रहा है काम

काइनेट ने ये भी कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ओवरऑल डिजाइन पहले ही कंपनी की तरफ से डेवलप और इंटीग्रेट किया जा चुका है. उसने जोर देकर कहा कि सभी शामिल सप्लायर्स मंजूर किए गए इम्प्लीमेंटेशन प्लान के मुताबिक काम कर रहे हैं और प्रोजेक्ट की एक्टिविटीज शेड्यूल के मुताबिक आगे बढ़ रही हैं.

कितने ट्रेनों का कॉन्ट्रैक्ट हुआ था?

साल 2023 में भारतीय रेलवे ने 200 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेट के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिए थे. इनमें से 120 ट्रेनें काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस को दी गई थीं, जबकि बाकी 80 ट्रेन सेट का कॉन्ट्रैक्ट टिटागढ़ रेल सॉल्यूशंस लिमिटेड (TRSL) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के कंसोर्टियम को दिया गया था. एक बार तैयार हो जाने पर, इन ट्रेनों से भारत के बढ़ते रेलवे नेटवर्क पर सफर तेज, सुरक्षित और ज्यादा आरामदायक होने की उम्मीद है.

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निष्कर्ष

नए वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लॉन्च करने में देरी ये बताती है कि बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने से पहले टेक्निकल मंजूरी पूरी करना कितना जरूरी है. हालांकि पहली स्लीपर सर्विस पहले से ही चल रही है, लेकिन एक्सपैंशन प्लान में उम्मीद से ज्यादा समय लगेगा. भारतीय रेलवे रफ्तार बनाए रखने और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए दूसरे मैन्युफैक्चरिंग विकल्पों पर विचार कर रही है. एक बार डिजाइन से जुड़ी दिक्कतें सुलझ जाने के बाद, बाकी स्लीपर ट्रेन सेट से भारत के लंबी दूरी के रेल नेटवर्क को मॉडर्न, तेज रफ्तार वाली ओवरनाइट जर्नी की सुविधा मिलने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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