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मुंबई मेट्रो की लाइन नंबर 5 के डिपो का काम कितनी दूर तक पहुंचा? इन इलाकों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी

Mumbai Metro News: दिल्ली की तरह मुंबई में भी मेट्रो का जाल बिछ रहा है, और आने वाले सालों काफी तरक्की नजर आएगी. फिलहाल लाइन नंबर-5 में कशेली डिपो का काम तेजी से हो रहा है जो इस रूट का 'ऑपरेशनल बैकबोन' बनेगा.

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मुख्य बिंदु

  • मुंबई मेट्रो लाइन 5 डिपो का काम 23 फीसदी तक पूरा हो चुका है.
  • कशेली डिपो में लगभग 30 मेट्रो ट्रेनों की देखरेख, जांच और पार्किंग की सुविधा होगी.
  • इस डिपो में टेस्ट ट्रैक, कंट्रोल सेंटर, वर्कशॉप और इंस्पेक्शन बे शामिल हैं.
  • मेट्रो लाइन 5 से ठाणे, भिवंडी, कल्याण और उल्हासनगर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी.
  • IIT बॉम्बे की मदद से समुद्री मिट्टी का एडवांस्ड ट्रीटमेंट किया जा रहा है.

Mumbai Metro Line 5 Kasheli Depot: मुंबई मेट्रो लाइन 5 के लिए कशेली डिपो का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिससे ठाणे, भिवंडी, कल्याण और उल्हासनगर के लोगों को बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी. ताजा जानकारी के मुताबिक, जून 2026 तक डिपो का तकरीबन 23 फीसदी काम पूरा हो चुका था और यह 32 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर मेट्रो के ऑपरेशन में अहम रोल अदा करेगा.

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डिपो की खासियत

हालांकि पैसेंजर्स सीधे डिपो तक नहीं जा सकेंगे, लेकिन ये मेट्रो लाइन 5 के लिए सेंट्रल मेंटनेंस और ऑपरेशनल हब के तौर पर काम करेगा. इस कॉरिडोर पर चलने वाली हर मेट्रो ट्रेन को मुसाफिरों की सेवा में लौटने से पहले इस सुविधा केंद्र में निरीक्षण, टेस्टिंग, मरम्मत और रेगुलर मेंटनेंस से गुजरना होगा, जिससे सुरक्षित और भरोसेमंद संचालन सुनिश्चित हो सके.

कितनी ट्रेनें होंगी पार्क?

इस डिपो को तकरीबन 30 मेट्रो ट्रेन सेट रखने की क्षमता के साथ डेवलप किया जा रहा है. इसमें ट्रेनों की सर्विसिंग, तकनीकी निरीक्षण और रोलिंग स्टॉक की पार्किंग के लिए मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर होगा. एक खास टेस्ट ट्रैक इंजीनियरों को सेवा में लगाने से पहले ट्रेन की परफॉर्मेंस की जांच करने की सुविधा देगा, जबकि डिपो कंट्रोल सेंटर कॉम्प्लेक्स के अंदर ट्रेनों की आवाजाही पर नजर रखेगा और मेंटनेंस के कामों में तालमेल बिठाएगा.

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तेजी से चल रहा काम

मेट्रो लाइन 5 की शुरुआती शुरुआत में मदद के लिए, अस्थायी निरीक्षण, टेस्टिंग और कमीशनिंग सुविधाएं भी बनाई जा रही हैं. उम्मीद है कि ये सिस्टम अधिकारियों को चरणों में सेवाएं शुरू करने और विस्तार के दौरान संचालन के लिए तैयार रहने में मदद करेंगे. कशेली टोल प्लाजा के पास तकरीबन 27 हेक्टेयर में फैले इस डिपो में मरम्मत के लिए वर्कशॉप, इंस्पेक्शन बे, ट्रेन पार्किंग की सुविधा, यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासनिक कार्यालय, मेंटनेंस के लिए आधुनिक उपकरण और कर्मचारियों के रहने की जगह होगी.

‘ऑपरेशनल बैकबोन’

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने कशेली डिपो को मेट्रो लाइन 5 का ऑपरेशनल बैकबोन बताया है. अधिकारियों का मानना ​​है कि ये फैसिलिटी पूरे कॉरिडोर में एफिशिएंट, भरोसेमंद और सुरक्षित मेट्रो सेवाएं देने में मदद करेगी और साथ ही फ्यूचर में नेटवर्क के विस्तार में भी मददगार होगी.

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सीएम ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मेट्रो लाइन 5 वर्ल्ड क्लास पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने के महाराष्ट्र के संकल्प को दिखाती है. उन्होंने कहा कि इस मेट्रो कॉरिडोर से ठाणे, भिवंडी, कल्याण और उल्हासनगर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे तेजी से शहरी विकास और आर्थिक तरक्की होगी.

मिट्टी में छिपा है चैलेंज

कंस्ट्रक्शन टीमें साइट की चैलेंजिंग समुद्री मिट्टी से जुड़ी चुनौतियों का भी हल निकाल रही हैं. IIT बॉम्बे की तकनीकी सलाह से, डिपो की लंबे समय तक स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी और सेफ ऑपरेशन एनश्योर करने के लिए जमीन को मजबूत करने के आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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निष्कर्ष

कशेली डिपो मुंबई मेट्रो लाइन 5 का एक अहम हिस्सा है और यह मेट्रो के सुचारू, सुरक्षित और भरोसेमंद संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. भले ही यात्री कभी इस सुविधा केंद्र में न जाएं, लेकिन इसके मेंटनेंस, टेस्टिंग और ऑपरेशन के काम सर्विस की क्वालिटी पर सीधा असर डालेंगे. जैसे-जैसे कंस्ट्रक्शन वर्क आगे बढ़ेगा, उम्मीद है कि ये डिपो 4 बड़े शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी में मदद करेगा और महाराष्ट्र के बढ़ते शहरी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करेगा, जिससे इस इलाके की बढ़ती आवाजाही और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

Frequently Asked Questions

जून 2026 तक डिपो का लगभग 23% काम पूरा हो चुका है.
ये मुंबई मेट्रो लाइन 5 कॉरिडोर पर संचालन में मदद करेगा, जो ठाणे, भिवंडी, कल्याण और उल्हासनगर को जोड़ता है.
इस सुविधा केंद्र को लगभग 30 मेट्रो ट्रेनसेट की पार्किंग और रखरखाव के लिए डिजाइन किया गया है.
डिपो में वर्कशॉप, इंस्पेक्शन बे, टेस्ट ट्रैक, डिपो कंट्रोल सेंटर, ट्रेन पार्किंग एरिया, यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासनिक भवन और स्टाफ क्वार्टर जैसी सुविधाएं होंगी.
ये प्रोजेक्ट मुश्किल समुद्री क्ले मिट्टी (मरीन क्ले सॉइल) पर बनाया जा रहा है, जिसके लिए IIT बॉम्बे की तकनीकी मदद से डेवलप्ड एडवांस्ड जमीन-सुधार तकनीकों की जरूरत है.
First published on: Jul 19, 2026 03:25 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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