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युवराज मेहता की मौत का जिम्मेदार कौन, बिल्डर और अथॉरिटी की लापरवाही की वजह से बना जानलेवा तालाब?

Yuvraj Mehta Death: नोएडा में निर्माणाधीन गड्ढे में कार गिरने से सोफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई. युवराज मेहता की दुखद मौत ने नोएडा में सड़क और निर्माण सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए. पढ़िए मोहम्मद युसूफ की ये रिपोर्ट.

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नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या नजर आती है. जिस कृत्रिम जलाशय में युवराज की कार डूबी, उसकी विशालता और गहराई देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. आखिर 50 एकड़ में फैला और 45 फीट गहरा ये ‘मौत का तालाब’ अधिकारियों की नाक के नीचे कैसे बन गया? क्या प्राधिकरण के अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे थे? ये कोई झील या प्राकृतिक तालाब नहीं है, ये बिल्डर की लापरवाही और अथॉरिटी की अनदेखी से पैदा हुआ एक जहरीला समंदर है.

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किसकी लापरवाही से गई जान?

करीब 49 एकड़ में फैला ये जलाशय 45 फीट से ज्यादा गहरा है. आंकड़ों पर गौर कीजिए, इस जलाशय में 274 करोड़ लीटर सीवर का पानी जमा है. तुलना करें तो ये 1,100 ओलंपिक स्विमिंग पूल्स के बराबर है. अगर इसे 10 हजार लीटर वाले टैंकरों से भरना शुरू करें, तो 2 लाख 74 हजार से ज्यादा टैंकर लगेंगे. इतना विशाल जलाशय एक दिन में नहीं बना, तो सवाल है कि सालों से प्राधिकरण क्या कर रहा था?

अथॉरिटी को कई बार लिखी चिट्ठी

सोसाइटी के निवासियों ने एक नहीं, तीन-तीन बार पत्र लिखकर इस खतरे की चेतावनी दी थी. लेकिन फाइलें दबी रहीं. अब ADG भानू भास्कर के नेतृत्व में SIT इन तीखे सवालों के जवाब ढूंढ रही है कि NDRF को सूचना देने में देरी क्यों हुई? जब 80 कर्मचारी वहां मौजूद थे, तो पौने दो घंटे तक युवराज को बचाने की कोशिश क्यों नहीं हुई? गोताखोर और स्टीमर मौके पर समय से क्यों नहीं पहुंचे?

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मामले की जांच में जुटी SIT की टीम

हैरानी की बात देखिए, प्राधिकरण के पास ये डाटा तक नहीं है कि ये प्लॉट किसका है. SIT की मैराथन बैठक में पुलिस कमिश्नर और DM से भी सवाल-जवाब हुए हैं. एसआईटी अपनी जांच सीधे तौर पर हादसे के कारण और बचाव में देरी के जिम्मेदारों की तलाशने के लिए कर रही है. अधिकारियों ने जांच को 5 दिन में चरणबद्ध रूप से करने का निर्णय लिया है. पहले दिन दो चरण पूरे हुए. इसमें जांच अधिकारियों ने प्राधिकरण, पुलिस, प्रशासन और पीड़ित पक्ष से हादसे से जुड़ी जानकारी ली. इसमें सामने आए तथ्यों का पुष्टि घटनास्थल पर जाकर किया. आगे की जांच आज से फिर शुरू की गई है.

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First published on: Jan 21, 2026 02:36 PM

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