who is Jyotsna Singh: उत्तर प्रदेश के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से एक्टिव हुई समाजवादी पार्टी (सपा) चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है. पार्टी स्तर पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन शुरू हो चुका है और कई सीटों पर इशारों-इशारों में टिकट के संकेत भी दिए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव इन दिनों पार्टी पदाधिकारियों और विधायकों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. इन बैठकों में वे जमीनी हालात, संगठन की स्थिति और संभावित प्रत्याशियों को लेकर फीडबैक ले रहे हैं. इसी कड़ी में प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा में है. मंगलवार को हुई एक बैठक में भी कुंडा सीट को लेकर चर्चा हुई, जहां अखिलेश यादव ने इशारों में ज्योत्सना सिंह के नाम पर सहमति जताई. हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
Happy Birthday ma'am a ray of hope for women.!🌸#dimpleyadav pic.twitter.com/Pi0xwRYi7Z
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कौन हैं सपा सांसद प्रिया सरोज की करीबी ज्योत्सना सिंह?
क्रिकेटर रिंकू सिंह की मंगेतर समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज की करीबी माने जाने वालीं ज्योत्सना सिंह प्रतापगढ़ की रहने वाली हैं. उन्होंने एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ से पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई की है. वर्ष 2016 में उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी और तब से पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं. ज्योत्सना सिंह और सांसद प्रिया सरोज के परिवारों के आपसी संबंध भी हैं और दोनों ही लंबे समय से सपा से जुड़े रहे हैं. ज्योत्सना सिंह के पारिवारिक संबंध भी सियासत से जुड़े रहे हैं. उनके पिता राजकुमार सिंह प्रतापगढ़ की सदर सीट से पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं और समाजवादी पार्टी के टिकट पर नगर पालिका चुनाव भी लड़ चुके हैं. वहीं उनकी माता भी सक्रिय राजनीति में हैं. वे सदर ब्लॉक की पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं और वर्तमान में समाजवादी पार्टी महिला सभा, प्रतापगढ़ की जिला अध्यक्ष हैं.
अखिलेश यादव ने पहले भी दिए हैं ऐसे संकेत
यह पहला मौका नहीं है जब अखिलेश यादव ने टिकट को लेकर संकेतात्मक संदेश दिया हो. इससे पहले मेहनौन सीट से जुड़ी एक युवा महिला कार्यकर्ता को भी उन्होंने मतदाता सूची (SIR) में नाम जुड़वाने की सलाह देते हुए इशारों में तैयारी करने को कहा था. अगर समाजवादी पार्टी औपचारिक रूप से ज्योत्सना सिंह को कुंडा से उम्मीदवार बनाती है, तो यह मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है. राजा भैया के खिलाफ युवा और महिला चेहरे को उतारने की रणनीति को सपा के बड़े राजनीतिक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है. फिलहाल, नजरें समाजवादी पार्टी के अगले कदम और आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं.










