Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

जल जीवन मिशन में लापरवाही पड़ी भारी, यूपी में 12 इंजीनियर सस्पेंड

यूपी के 12 जिलों में जल जीवन मिशन में लापरवाही बरतने पर 26 इंजीनियरों पर बड़ी गाज गिरी है. सरकार ने 12 इंजीनियरों को सस्पेंड कर काम में ढिलाई के खिलाफ सख्त संदेश दिया है.

Author
Written By: Raja Alam Updated: Mar 26, 2026 09:59

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ‘हर घर नल’ योजना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. प्रदेश के 12 जिलों में तैनात 26 इंजीनियरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने 12 को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. यह एक्शन उन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया है जिनमें जल जीवन मिशन के तहत हो रहे कामों की क्वालिटी और पाइपलाइन बिछाने के बाद खराब छोड़ी गई सड़कों का मुद्दा उठाया गया था. सरकार ने साफ कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पानी पहुंचाने के लक्ष्य में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

सस्पेंड होने वाले इंजीनियरों की लिस्ट

अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव के निर्देश पर जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़ी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं. निलंबित होने वाले इंजीनियरों में लखीमपुर खीरी के अविनाश गुप्ता, जौनपुर के सौमित्र श्रीवास्तव, गाजीपुर के मोहम्मद कासिम हाशमी और चंदौली के अमित राजपूत समेत कई बड़े नाम शामिल हैं. इनके अलावा हाथरस, आजमगढ़, बरेली और कुशीनगर जैसे जिलों के इंजीनियरों पर भी गाज गिरी है. सस्पेंशन के साथ ही चार इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और सात अन्य का तबादला कर दिया गया है ताकि प्रोजेक्ट की निगरानी को बेहतर बनाया जा सके.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा, बस में लगी आग में जिंदा जल गए 10 यात्री, गूंजी चीखें

भ्रष्टाचार और अधूरी परियोजनाओं पर सख्त रुख

सरकार को ऐसी कई शिकायतें मिली थीं जिनमें काम पूरा दिखाकर भुगतान लेने की कोशिश की गई थी लेकिन मौके पर काम अधूरा पड़ा था. जल जीवन मिशन केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक है जिसका मकसद हर घर तक साफ पानी पहुंचाना है. लेकिन कई जगहों पर पाइपलाइन डालने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं की गई जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. विभाग ने अब स्पष्ट संदेश दिया है कि जो भी अधिकारी इस मिशन मोड की योजना में ढिलाई बरतेगा उसे बर्खास्तगी जैसे कठोर कदमों का भी सामना करना पड़ सकता है.

---विज्ञापन---

मंत्री और विधायक के बीच विवाद से शुरू हुई सख्ती

इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के पीछे महोबा में हुई एक घटना को भी मुख्य वजह माना जा रहा है. वहां जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने रोककर पाइपलाइन के बाद खराब पड़ी सड़कों का मुद्दा उठाया था. मंत्री और विधायक के बीच हुई इस तीखी बहस ने पूरे सिस्टम की कमियों को उजागर कर दिया और मामला पार्टी स्तर तक पहुंच गया. इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में जांच के आदेश दिए और उन सभी इंजीनियरों को चिन्हित किया जो अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे थे जिसके परिणामस्वरूप आज यह बड़ा एक्शन देखने को मिला है.

First published on: Mar 26, 2026 09:55 AM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.