Ganga Expressway Extension to Haridwar: यूपी कैबिनेट ने 25 अगस्त 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तराखंड के हरिद्वार तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. ये दोनों राज्यों के बीच रोड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने मददगार साबित होगी. ये फैसला सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में लिया गया.
कौन उठाएगा प्रोजेक्ट का खर्च?
इस एक्टेंशन को 6-लेन वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के तौर पर डेवलप किया जाएगा, जिसका इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य में 8 लेन तक विस्तार की गुंजाइश के साथ डिजाइन किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 10,761 करोड़ रुपये है, जिसे यूपी सरकार उठाएगी. इस स्टेज में प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से किसी वित्तीय मदद का प्रस्ताव नहीं है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद, अधिकारी आगे की फॉर्मेलिटीज पर काम शुरू करेंगे, जिसमें डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करना भी शामिल है.
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बिजनौर और हरिद्वार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी
अभी बिजनौर और हरिद्वार के बीच रोड ट्रैवल खास तौर से नेशनल हाईवे-34 पर निर्भर है, जो मेरठ, बिजनौर और हरिद्वार को जोड़ता है. प्रपोज्ड एक्सप्रेसवे के एक्टेंशन से यात्रियों और कमर्शियल ट्रैफिक के लिए तेज और ज्यादा बेहतर रूट मिलने की उम्मीद है.
इस प्रोजेक्ट से मौजूदा गंगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए लखनऊ के साथ बिजनौर की कनेक्टिविटी भी मजबूत होने की उम्मीद है. राज्य सरकार के मुताबिक, बेहतर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर से पूरे इलाके में इंवेस्टमेंट, बिजनेस, औद्योगिक विकास और दूसरी इकॉनोमिकल एक्टिविटीज को बढ़ावा मिल सकता है.
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रिलिजियस टूरिज्म को बढ़ावा
इस एक्सटेंशन से प्रयागराज और हरिद्वार को जोड़ने वाला एक एक्सेस-कंट्रोल्ड रोड कॉरिडोर बन सकता है; ये दोनों शहर कुंभ से जुड़े हैं और गंगा के किनारे बसे हैं. बेहतर कनेक्टिविटी से तीर्थयात्रियों और सैलानियों के लिए सफर आसान होने की उम्मीद है, साथ ही धार्मिक और स्पिरिचुअल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा. सरकार को कंस्ट्रक्शन वर्क के दौरान और टूरिज्म और उससे जुड़े बिजनेसेज के जरिए से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है. मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने वाले मौजूदा 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को किया था.
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