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उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

UP में अब विवादित जमीन की नहीं होगी रजिस्ट्री, CM योगी ने पास किया नया प्रस्ताव

यूपी में सीएम की कैबिनेट बैठक हुई। इसमें कई अहम फैसले लिए गए। इसमें जमीन खरीद फरोख्त का फैसला सबसे अहम रहा। यूपी में जमीनों को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलते थे। कई बार तो इसके पीछे हत्याएं तक हो जाती थीं। अब योगी सरकार ने इस मामले में सख्ती कर दी है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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Edited By : Raghav Tiwari Updated: Mar 11, 2026 13:43

उप्र में जमीन रजिस्ट्री को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। अब प्रदेश में विवादित जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। सीधे तौर पर कहें तो अब जमीन खरीद-फरोख्त के नियम और सख्त हो गए हैं। इसके पीछे सरकार ने सुरक्षित लेनेदेन और झूठे मुकदमों से बचना बताया है। सीएम योगी ने कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को पास कर दिया है। इससे फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लग जाएगी। नया नियम बनने के बाद अब रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े कागजों की गहन जांच होगी।

दरअसल, हाल ही में यूपी में सीएम की कैबिनेट बैठक हुई। इसमें कई अहम फैसले लिए गए। इसमें जमीन खरीद फरोख्त का फैसला सबसे अहम रहा। यूपी में जमीनों को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलते थे। कई बार तो इसके पीछे हत्याएं तक हो जाती थीं। अब योगी सरकार ने इस मामले में सख्ती कर दी है। जमीन की फर्जी रजिस्ट्री के केस बढ़ते देख अब योगी सरकार ने विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर बैन लगा दिया है।

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आपसी रंजिश के अलावा कई बार सरकारी या कुर्क संपत्ति भी रजिस्ट्री के जरिए दूसरे के नाम दर्ज हो जाती है। ऐसे में सालों तक कोर्ट केस और आर्थिक-मानसिक परेशानियों के रूप के विवाद भी सामने आता थे। अब संपत्ति की रजिस्ट्री को और पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लग सकेगी। इससे लोगों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत मिलेगी।

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मामले पर राज्य के स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जयसवाल ने कहा कि कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें संपत्ति का वास्तविक मालिक कोई और होता है लेकिन रजिस्ट्री किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हो जाती है। कई बार प्रतिबंधित या विवादित जमीन को भी बेच दिया जाता था। कई बार कुर्क की संपत्ति या सरकारी जमीन का भी विक्रय विलेख तैयार कराकर उसका पंजीकरण करा लिया जाता है। पता तब चलता है जब कोई पक्ष अदालत से गुहार लगाता है। तब तक जमीन की खरीद-फरोख्त कई हाथों में जा चुकी होती है। ऐसे में विवाद और जटिल हो जाता है।

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First published on: Mar 11, 2026 01:19 PM

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