UP News: यूपी में आकार ले रहा है नया ‘नोएडा’! यहां 5500 बीघा जमीन पर सजेगा हाईटेक शहर
यूपी के अमरोहा जिले के हसनपुर तहसील में नए औद्योगिक शहर को बसाने की योजना का काम तेजी से चल रहा है. माना जा रहा कि इस परियोजना के पूरे होने से न सिर्फ आसपास के जिलों में बल्कि पूरे प्रदेश में रोजगार और विकास के अवसर खुलेंगे. आइए जानते हैं इस बड़े प्रोजेक्ट के बारे में.
उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है और अब अमरोहा जिले की हसनपुर तहसील एक नई पहचान पाने की ओर बढ़ रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास एक बड़े औद्योगिक ग्रीन शहर को विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. यह परियोजना सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, बेहतर सुविधाएं और आर्थिक प्रगति के नए रास्ते भी खोलेगी. इस बड़ी योजना को देखते हुए क्षेत्र के लोगों में उत्साह का माहौल है और इसे भविष्य के नए 'नोएडा' के रूप में भी देखा जा रहा है.
शुरुआत में इस परियोजना के लिए हसनपुर क्षेत्र के मंगरौला, दौलतपुर कला और रुस्तमपुर खादर गांवों की लगभग 140 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई थी और इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का बड़ा हिस्सा पूरा भी हो चुका है. मीडियो रिपोर्ट की मानें तो, इस प्रोजेक्ट का अब दायरा और बढ़ाया जा रहा है. नई तैयारियों के तहत करीब 5500 बीघा भूमि पर विशाल औद्योगिक ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई गई है. इससे क्षेत्र में आधुनिक उद्योगों, व्यापारिक गतिविधियों और निवेश की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी.
कई नए गांव होंगे शामिल
जागरण के सूत्रों के अनुसार, पहले से चयनित गांवों के अलावा गांगटकोला, हाकमपुर, पतेई खादर, गंगवार, बुरावली और बांसका कला सहित कई अन्य गांवों को भी इस परियोजना में शामिल किया जा सकता है. संबंधित अधिकारियों ने इन क्षेत्रों का निरीक्षण कर भौगोलिक स्थिति और विकास की संभावनाओं का आकलन किया है. अगर यह विस्तार योजना लागू होती है तो पूरे क्षेत्र में सड़क, बिजली, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास देखने को मिल सकता है.
मुआवजे और सर्किल रेट को लेकर किसानों की चिंता बरकरार
जहां एक ओर यह परियोजना विकास की नई उम्मीदें लेकर आ रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों की कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं. इस प्रोजेक्ट को लेकर जारी भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का कहना है कि उनके गांवों का सर्किल रेट लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है. उनका मानना है कि वर्तमान दरों पर मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य की तुलना में कम पड़ रहा है. किसानों की मांग है कि भूमि का सर्किल रेट बढ़ाया जाए ताकि उन्हें उनकी जमीन का सही दाम मिल सके. आने वाले समय में प्रशासन और किसानों के बीच संतुलित समाधान इस परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है और अब अमरोहा जिले की हसनपुर तहसील एक नई पहचान पाने की ओर बढ़ रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास एक बड़े औद्योगिक ग्रीन शहर को विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. यह परियोजना सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, बेहतर सुविधाएं और आर्थिक प्रगति के नए रास्ते भी खोलेगी. इस बड़ी योजना को देखते हुए क्षेत्र के लोगों में उत्साह का माहौल है और इसे भविष्य के नए ‘नोएडा’ के रूप में भी देखा जा रहा है.
शुरुआत में इस परियोजना के लिए हसनपुर क्षेत्र के मंगरौला, दौलतपुर कला और रुस्तमपुर खादर गांवों की लगभग 140 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई थी और इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का बड़ा हिस्सा पूरा भी हो चुका है. मीडियो रिपोर्ट की मानें तो, इस प्रोजेक्ट का अब दायरा और बढ़ाया जा रहा है. नई तैयारियों के तहत करीब 5500 बीघा भूमि पर विशाल औद्योगिक ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई गई है. इससे क्षेत्र में आधुनिक उद्योगों, व्यापारिक गतिविधियों और निवेश की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी.
कई नए गांव होंगे शामिल
जागरण के सूत्रों के अनुसार, पहले से चयनित गांवों के अलावा गांगटकोला, हाकमपुर, पतेई खादर, गंगवार, बुरावली और बांसका कला सहित कई अन्य गांवों को भी इस परियोजना में शामिल किया जा सकता है. संबंधित अधिकारियों ने इन क्षेत्रों का निरीक्षण कर भौगोलिक स्थिति और विकास की संभावनाओं का आकलन किया है. अगर यह विस्तार योजना लागू होती है तो पूरे क्षेत्र में सड़क, बिजली, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास देखने को मिल सकता है.
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मुआवजे और सर्किल रेट को लेकर किसानों की चिंता बरकरार
जहां एक ओर यह परियोजना विकास की नई उम्मीदें लेकर आ रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों की कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं. इस प्रोजेक्ट को लेकर जारी भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का कहना है कि उनके गांवों का सर्किल रेट लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है. उनका मानना है कि वर्तमान दरों पर मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य की तुलना में कम पड़ रहा है. किसानों की मांग है कि भूमि का सर्किल रेट बढ़ाया जाए ताकि उन्हें उनकी जमीन का सही दाम मिल सके. आने वाले समय में प्रशासन और किसानों के बीच संतुलित समाधान इस परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.