Maha Kumbh 2025 Stampede in Jhunsi: प्रयागराज महाकुंभ में 29 जनवरी की सुबह हुई भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 लोग घायल हो गए। इस हादसे के कुछ घंटे बाद ही भगदड़ की एक और घटना सामने आई है। दूसरा हादसा संगम नोज से महज 2 किलोमीटर की दूरी झूसी में हुआ। इस घटना में स्थानीय निवासी और प्रत्यक्षदर्शी जनहानि का दावा कर रहे हैं, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।
लल्लनटाॅप की एक रिपोर्ट के अनुसार झूसी में भगदड़ वाली जगह से कपड़े, जूते और बोतलों के ढेर को ट्रैक्टरों द्वारा वहां से हटाया जा रहा था। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि कई लोग भगदड़ की चपेट में आए थे। झूसी के हल्दीराम कियोस्क की नेहा ओझा ने बताया कि भगदड़ के समय वहां पुलिस की ओर से कोई नजर नहीं आया। बाद में पुलिस पहुंची और लोगों को वीडियो बनाने से रोक दिया। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने कई लोगों को भीड़ द्वारा कुचलते हुए देखा गया। उसने कहा कि वहां कोई भी मदद करने वाला नहीं था।
हालांकि इस घटना पर प्रशासन काफी बाद में सक्रिय हुआ। महाकुंभ के डीआईजी वैभव कृष्ण सामने आएं उन्होंने कहा झूसी में किसी प्रकार की घटना नहीं है। भगदड़ पर केवल संगम नोज पर हुआ। उन्होंने झूसी की घटना से इंकार कर दिया।
लोगों ने बैरिकेड्स तोड़े
बता दें कि संगम पहुंचने के लिए झूसी से होकर जाना पड़ता है। संगम नोज के पास हुई भगदड़ के कुछ घंटों बाद ही झूसी पर भी भगदड़ हुई थी। प्रयागराज के रहने वाले एक युवक ने बताया कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वह पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। लोगों ने बैरिककेड्स तोड़ना शुरू कर दिया था। चारों ओर से श्रद्धालु आ रहे थे, सड़कें ब्लाॅक थीं और पैदल चलने के लिए जगह नहीं थी।
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15-20 लोगों ने फैलाई अराजकता
लल्लनटाॅप की रिपोर्ट के अनुसार एक साधु ने बताया कि एक बस यहां आकर रुकी। करीब 15-20 युवक बस से उतरे और जानबूझकर अराजकता फैलाई, जिससे भगदड़ मच गई। उन्होंने बैरियर तोड़ दिया और धक्का मुक्की शुरू कर दी। बैरियर के गिरते ही भीड़ भी बेकाबू हो गई और लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए आगे बढ़ गए।
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लोगों ने बैरिकेड्स तोड़े
बता दें कि संगम पहुंचने के लिए झूसी से होकर जाना पड़ता है। संगम नोज के पास हुई भगदड़ के कुछ घंटों बाद ही झूसी पर भी भगदड़ हुई थी। प्रयागराज के रहने वाले एक युवक ने बताया कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वह पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। लोगों ने बैरिककेड्स तोड़ना शुरू कर दिया था। चारों ओर से श्रद्धालु आ रहे थे, सड़कें ब्लाॅक थीं और पैदल चलने के लिए जगह नहीं थी।
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