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Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में पानी की समस्या से परेशान निवासी सड़क पर उतरे, एक सप्ताह बाद भी नहीं हुआ समाधान

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सुपरटेक इकोविलेज 1 सोसायटी में पानी की किल्लत को लेकर शनिवार को लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। निर्धारित समय पर भी जब टावरों में जल आपूर्ति नहीं हुई, तो महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग मुख्य गेट पर एकत्र हो गए।

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Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सुपरटेक इकोविलेज 1 सोसायटी में पानी की किल्लत को लेकर शनिवार को लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। निर्धारित समय पर भी जब टावरों में जल आपूर्ति नहीं हुई, तो महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग मुख्य गेट पर एकत्र हो गए। मेंटेनेंस प्रबंधन के खिलाफ जोरदार हंगामा किया। गुस्साए लोगों ने सोसाइटी के गेट नंबर 1 पर नारेबाजी की। मेंटेनेंस ऑफिस का घेराव किया। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्थिति पर काबू पाया।

6 टावरों में पूरी तरह बंद रही जलापूर्ति

करीब 52 टावरों वाली इस बड़ी हाउसिंग सोसाइटी में लगभग 7,000 परिवार रहते हैं। प्रबंधन ने (शनिवार-रविवार) सुबह 6 बजे से 11 बजे और शाम को 6 बजे से 10 बजे तक जलापूर्ति का समय तय किया है, लेकिन शनिवार को करीब 6 टावरों में इन निर्धारित घंटों में भी पानी नहीं पहुंचा। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि वह बिना पानी के कैसे अपना जीवन यापन करें।

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बाहर से खरीदनी पड़ी बोतलें

सोसायटी में रहने वाले संजय शर्मा ने बताया कि कुछ लोगों ने पानी की संभावित किल्लत को भांपते हुए पानी स्टोर कर रखा था, लेकिन गर्मी के मौसम में खपत अधिक होने के कारण वह भी दोपहर तक समाप्त हो गया। इसके बाद लोगों को दैनिक कार्यों के लिए बाजार से पानी की बोतलें खरीदनी पड़ीं। पानी नहीं आने की वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पाए, लोगों को ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ी।

चार्ज पूरा, पानी सप्लाई कम घंटे

निवासी सत्येंद्र सिंह ने सवाल उठाया कि जब मेंटेनेंस चार्ज 24 घंटे जल आपूर्ति की सुविधा के लिए दिया जा रहा है तो फिर समय तय करके पानी क्यों दिया जा रहा है। इस तुगलकी फरमान से लोगों को दिक्कत हो रही है। लोग अपनी समस्या की मांग को लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए है।

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एक सप्ताह से जारी है पानी संकट

आरके पांडे ने बताया कि सोसायटी में बीते 7 दिन यानी एक सप्ताह से पानी का संकट है। करीब 25 टावरों में रोजाना जल आपूर्ति बाधित हो रही है। प्रबंधन की ओर से पानी के टैंकर मंगवाए जा रहे हैं, लेकिन वह नाकाफी हैं। सबसे गंभीर चिंता यह है कि कुछ टैंकरों में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का पानी भेजा जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ रहा हैं।

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First published on: Jul 19, 2025 05:57 PM

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