Who is Champat Rai: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में इन दिनों श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला पूरी तरह गरमाया हुआ है. इस कथित घपले को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर उंगलियां उठ रही हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है. इस विवाद में समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष के तमाम नेताओं के अलावा, बीजेपी के पूर्व सांसद विनय कटियार ने भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों को चढ़ावे की कथित चोरी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. इस पूरे घटनाक्रम और एसआईटी (SIT) की पूछताछ के बीच ट्रस्ट में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे इसके महासचिव चंपत राय भी आरोपों के घेरे में हैं. आइए जानते हैं कि चंपत राय कौन हैं और राम मंदिर आंदोलन में उनका क्या इतिहास रहा है.
कैमिस्ट्री के प्रोफेसर रहे हैं चंपत राय
चंपत राय का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील में हुआ था. उनके पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल था, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे. चंपत राय ने कैमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) में उच्च शिक्षा हासिल की और धामपुर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर नियुक्त हुए. बचपन से ही संघ के विचारों से प्रभावित होने के कारण वे नौकरी के साथ-साथ आरएसएस में भी सक्रिय रहे.
आपातकाल में गए जेल, छोड़ दी सरकारी नौकरी और नहीं की शादी
साल 1975 में देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू होने के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने कॉलेज पहुंच गई थी. उन्होंने 18 महीने जेल में बिताए. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए. उन्होंने जीवन भर विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया.
'रामलला के पटवारी' और आंदोलन के 'एनसाइक्लोपीडिया'
संघ के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर चंपत राय ने अवध क्षेत्र में युवाओं को एकजुट किया और 1991 में उन्हें अयोध्या भेजा गया. उन्होंने राम मंदिर आंदोलन की जमीनी तैयारी की और उस दौरान मंदिर से जुड़े हजारों ऐतिहासिक दस्तावेज और ग्रंथ सहेजे. कानूनी लड़ाई के लिए ऐतिहासिक साक्ष्य जुटाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का 'एनसाइक्लोपीडिया' और 'रामलला का पटवारी' भी कहा जाता है. 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के समय भी वे वहां मौजूद थे.
विहिप से लेकर ट्रस्ट के महासचिव तक का सफर
विश्व हिंदू परिषद (VHP) में उनका कद लगातार बढ़ता गया. वे विहिप के केंद्रीय मंत्री, संयुक्त महामंत्री और अंतरराष्ट्रीय महामंत्री रहे. वर्तमान में वे विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद, 2020 में उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया, और तब से वे मंदिर प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
Who is Champat Rai: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में इन दिनों श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला पूरी तरह गरमाया हुआ है. इस कथित घपले को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर उंगलियां उठ रही हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है. इस विवाद में समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष के तमाम नेताओं के अलावा, बीजेपी के पूर्व सांसद विनय कटियार ने भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों को चढ़ावे की कथित चोरी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. इस पूरे घटनाक्रम और एसआईटी (SIT) की पूछताछ के बीच ट्रस्ट में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे इसके महासचिव चंपत राय भी आरोपों के घेरे में हैं. आइए जानते हैं कि चंपत राय कौन हैं और राम मंदिर आंदोलन में उनका क्या इतिहास रहा है.
कैमिस्ट्री के प्रोफेसर रहे हैं चंपत राय
चंपत राय का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील में हुआ था. उनके पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल था, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे. चंपत राय ने कैमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) में उच्च शिक्षा हासिल की और धामपुर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर नियुक्त हुए. बचपन से ही संघ के विचारों से प्रभावित होने के कारण वे नौकरी के साथ-साथ आरएसएस में भी सक्रिय रहे.
आपातकाल में गए जेल, छोड़ दी सरकारी नौकरी और नहीं की शादी
साल 1975 में देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू होने के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने कॉलेज पहुंच गई थी. उन्होंने 18 महीने जेल में बिताए. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए. उन्होंने जीवन भर विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया.
‘रामलला के पटवारी’ और आंदोलन के ‘एनसाइक्लोपीडिया’
संघ के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर चंपत राय ने अवध क्षेत्र में युवाओं को एकजुट किया और 1991 में उन्हें अयोध्या भेजा गया. उन्होंने राम मंदिर आंदोलन की जमीनी तैयारी की और उस दौरान मंदिर से जुड़े हजारों ऐतिहासिक दस्तावेज और ग्रंथ सहेजे. कानूनी लड़ाई के लिए ऐतिहासिक साक्ष्य जुटाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का ‘एनसाइक्लोपीडिया’ और ‘रामलला का पटवारी’ भी कहा जाता है. 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के समय भी वे वहां मौजूद थे.
विहिप से लेकर ट्रस्ट के महासचिव तक का सफर
विश्व हिंदू परिषद (VHP) में उनका कद लगातार बढ़ता गया. वे विहिप के केंद्रीय मंत्री, संयुक्त महामंत्री और अंतरराष्ट्रीय महामंत्री रहे. वर्तमान में वे विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद, 2020 में उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया, और तब से वे मंदिर प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.