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कौन हैं जितेंद्र मिश्रा, जो बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर और कारगिल युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका

आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद से सिलेक्शन कमेटी को सीईओ पद के लिए 5585 आवेदन मिले थे, जिसमें से तीन नामों का चयन किया गया. हालांकि पहले सीईओ के तौर पर जितेंद्र मिश्रा का नाम पर मुहर लगी है.

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राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम का ऐलान हो चुका है. बुधवार को राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में हुई बैठक में ट्रस्ट के पहले सीईओ के तौर पर एयरफोर्स के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (Jeetendra Mishra) के नाम पर मुहर लगी. चंदा चोरी मामले के बाद से ही यूपी के अयोध्या स्थित राम मंदिर को अपने पहले सीईओ की तलाश थी. आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद से सिलेक्शन कमेटी को सीईओ पद के लिए 5585 आवेदन मिले थे, जिसमें से तीन नामों का चयन किया गया. हालांकि पहले सीईओ के तौर पर जितेंद्र मिश्रा के नाम का ऐलान किया गया है.

कौन हैं जितेंद्र मिश्रा?

बताया जाता है कि जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपालीपुरा से ताल्लुक रखते हैं. अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए जितेंद्र मिश्रा के सामने अब अयोध्या में तेजी से बढ़ रहे राम मंदिर के प्रशासन और संचालन की बड़ी जिम्मेदारी होगी. आपको जानकर हैरानी होगी कि जितेंद्र मिश्रा पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभा चुके हैं, उन्हें अपने काम के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया था. 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर 38 साल से अधिक का रहा.

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3000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव

अपने करियर के दौरान जितेंद्र मिश्रा ने 3000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी और 18 से अधिक अलग-अलग तहर के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों को उड़ाया. जितेंद्र मिश्रा फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के रूप में भी काम कर चुके हैं. जितेंद्र मिश्रा ने अपने करियर में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली है. वह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की नासिक इकाई में चीफ टेस्ट पायलट रहे. एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग और असेसमेंट से जुड़ी जिम्मेदारी भी निभाई. इसके अलावा उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट के कमांडेंट और कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल पदों पर काम किया.

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कारगिल युद्ध में भी निभा चुके हैं बड़ी जिम्मेदारी

आपको बता दें कि कारगिल युद्ध के दौरान जितेंद्र मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे, जिसने Mirage-2000 विमानों पर लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान इन हथियारों का इस्तेमाल टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे लक्ष्यों पर हमलों में किया गया. जून 2010 में उन्होंने फ्रांस में आयोजित वायु अभ्यास ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायुसेना की टुकड़ी का नेतृत्व किया. इतना ही नहीं सीनियर ऑफिसर के तौर पर जितेंद्र मिश्रा बरेली और पठानकोट स्थित वायुसेना की विंग्स की कमान भी संभाल चुके हैं.

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अब संभालेंगे राम मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी

CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा से मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के प्रशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, कर्मचारियों के कॉर्डिनेशन, चंदा-चढ़ावे और बड़े धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां संभालने की उम्मीद है. मंदिर परिसर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और बदलते नियमों के बीच जितेंद्र मित्र का सैन्य प्रशासन और ऑपरेशनल प्लानिंग का अनुभव ट्रस्ट के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.

First published on: Sep 02, 2026 05:29 PM

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