उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक दर्दनाक घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है. एक गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग मरीज की मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया है कि अगर समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी. परिवार का दावा है कि मरीज को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस रास्ते में प्रोटोकॉल की वजह से फंस गई, जिससे इलाज में देरी हुई. मृतक के परिजनों के मुताबिक, 75 साल के बुजुर्ग को दिल का दौरा पड़ने से उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई. परिवार का कहना है कि मरीज की हालत बेहद गंभीर थी और डॉक्टरों ने भी जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी थी. हालांकि रास्ते में एंबुलेंस को कुछ समय तक रुकना पड़ा, जिससे मरीज की स्थिति और बिगड़ती चली गई.
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परिजनों ने लगाया आरोप
परिजनों का आरोप है कि प्रोटोकॉल और ट्रैफिक कंट्रोल के चलते एंबुलेंस को प्राथमिकता नहीं दी गई. उनका कहना है कि मरीज को अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी उसकी मौत का प्रमुख कारण बनी. घटना के बाद परिवार ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है. अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और ये पता लगाया जाएगा कि एंबुलेंस कितनी देर तक रुकी रही, मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल सकी. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी.
इमरजेंसी सेवाओं को रास्ता देना जरूरी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आपातकालीन सेवाओं को किसी भी परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए. एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और बाकी आपातकालीन वाहनों को बिना रुकावट रास्ता मिलना जरूरी है, क्योंकि कुछ मिनटों की देरी भी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है. घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि VIP या बाकी प्रशासनिक व्यवस्थाओं के दौरान भी एंबुलेंस जैसी जीवनरक्षक सेवाओं को नहीं रोका जाना चाहिए. लोगों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए साफ और सख्त दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए.
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक दर्दनाक घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है. एक गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग मरीज की मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया है कि अगर समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी. परिवार का दावा है कि मरीज को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस रास्ते में प्रोटोकॉल की वजह से फंस गई, जिससे इलाज में देरी हुई. मृतक के परिजनों के मुताबिक, 75 साल के बुजुर्ग को दिल का दौरा पड़ने से उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई. परिवार का कहना है कि मरीज की हालत बेहद गंभीर थी और डॉक्टरों ने भी जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी थी. हालांकि रास्ते में एंबुलेंस को कुछ समय तक रुकना पड़ा, जिससे मरीज की स्थिति और बिगड़ती चली गई.
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परिजनों ने लगाया आरोप
परिजनों का आरोप है कि प्रोटोकॉल और ट्रैफिक कंट्रोल के चलते एंबुलेंस को प्राथमिकता नहीं दी गई. उनका कहना है कि मरीज को अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी उसकी मौत का प्रमुख कारण बनी. घटना के बाद परिवार ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है. अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और ये पता लगाया जाएगा कि एंबुलेंस कितनी देर तक रुकी रही, मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल सकी. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी.
इमरजेंसी सेवाओं को रास्ता देना जरूरी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आपातकालीन सेवाओं को किसी भी परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए. एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और बाकी आपातकालीन वाहनों को बिना रुकावट रास्ता मिलना जरूरी है, क्योंकि कुछ मिनटों की देरी भी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है. घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि VIP या बाकी प्रशासनिक व्यवस्थाओं के दौरान भी एंबुलेंस जैसी जीवनरक्षक सेवाओं को नहीं रोका जाना चाहिए. लोगों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए साफ और सख्त दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए.
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