उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया है. कोर्ट ने जब फैसला सुनाया तो अदालत में तालियां बजने लगीं. कोर्ट ने करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों की ओर से दलील सुनी. इसके बाद फैसला सुनाया.
सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा तो शंकराचार्य की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने अदालत के सामने तर्क प्रस्तुत किया.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत देते हुए झूंसी पुलिस स्टेशन में दर्ज कथित यौन उत्पीड़न के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.
कोर्ट के आदेश में मामले में अगली सुनवाई तक जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी गई है.
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलील
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए. इस दौरान उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया. शंकराचार्य के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और दिलीप गुप्ता ने दलील दी कि पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है. उसके माता-पिता का कोई अता-पता ही नहीं है. सरकार के वकील ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है. इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है. इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है.
उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया है. कोर्ट ने जब फैसला सुनाया तो अदालत में तालियां बजने लगीं. कोर्ट ने करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों की ओर से दलील सुनी. इसके बाद फैसला सुनाया.
सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा तो शंकराचार्य की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने अदालत के सामने तर्क प्रस्तुत किया.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत देते हुए झूंसी पुलिस स्टेशन में दर्ज कथित यौन उत्पीड़न के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.
कोर्ट के आदेश में मामले में अगली सुनवाई तक जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी गई है.
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलील
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए. इस दौरान उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया. शंकराचार्य के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और दिलीप गुप्ता ने दलील दी कि पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है. उसके माता-पिता का कोई अता-पता ही नहीं है. सरकार के वकील ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है. इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है. इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है.