हाथ पर 'I Love You Mom' का टैटू और आंखों में आंसू, मजबूर छात्र आयुष की कहानी… जिसने मां के लिए बेची किडनी

कानपुर के किडनी कांड में फंसे एमबीए छात्र आयुष की दर्दभरी कहानी सामने आई है. मजबूरी में किडनी बेचने वाला यह छात्र आईसीयू में भी अपनी मां की फिक्र में डूबा है.

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कानपुर के सनसनीखेज किडनी कांड में एमबीए छात्र आयुष कुमार की दर्दभरी दास्तान सामने आई है. आईसीयू में भर्ती आयुष को अपने शरीर के जख्मों से ज्यादा इस बात का डर सता रहा है कि उसकी मां को सच पता न चल जाए. वह बार-बार अपने हाथ पर बने ‘I Love You Mom’ के टैटू को सहलाते हुए पुलिस से बस यही मिन्नत कर रहा है कि उसकी मां को इस बारे में कुछ मत बताना क्योंकि वह यह सदमा नहीं सह पाएंगी. आयुष की हालत अब स्थिर है, लेकिन मानसिक रूप से वह बुरी तरह टूटा हुआ है और परिवार का जिक्र आते ही उसकी आवाज कांपने लगती है.

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पिता के साये के बाद बढ़ीं घर की जिम्मेदारियां

आयुष के जीवन में मुसीबतों का पहाड़ तब टूटा जब उसके पिता का निधन हो गया और घर की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई. परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब थी और घर की जमीन पहले से ही गिरवी रखी जा चुकी थी. पढ़ाई का खर्च उठाना उसके लिए नामुमकिन होता जा रहा था और पिछले दो महीनों से वह अपनी फीस भी जमा नहीं कर पा रहा था. उसने बैंक से लोन लेने की कोशिश की और कई जगह मदद मांगी, लेकिन जब हर तरफ से दरवाजे बंद हो गए, तो उसने मजबूरी में यह खौफनाक कदम उठाया. घर से वह यह कहकर निकला था कि उसे कानपुर में नौकरी मिल गई है.

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ठगी के जाल से किडनी रैकेट तक का सफर

पैसों की तंगी दूर करने के लिए आयुष पहले साइबर ठगों के चंगुल में भी फंसा था. उसने पैसे कमाने के लालच में ‘म्यूल अकाउंट’ तक खुलवाया, लेकिन वहां से उसे कोई फायदा नहीं हुआ. आखिर में वह किडनी बेचने वाले इस गिरोह के संपर्क में आ गया जिसने उसे मोटी रकम का लालच दिया. अब पुलिस की पूछताछ में आयुष ने बताया है कि उसे पूरी रकम भी नहीं मिली और वह बाकी के पैसों की मांग कर रहा है. देहरादून से आई उसकी एक दोस्त ने भी उससे मुलाकात की और इस आत्मघाती फैसले पर नाराजगी जताई, लेकिन आयुष की सबसे बड़ी फिक्र अब भी उसकी मां ही बनी हुई है.

कई शहरों में पुलिस की छापेमारी और जांच तेज

कानपुर पुलिस इस पूरे किडनी रैकेट की जड़ें खोदने में जुटी है और इसकी जांच के तार लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक फैल चुके हैं. फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और कई अहम सुराग हाथ लगे हैं. आयुष के परिवार को मामले की सूचना दे दी गई है और उसकी मां लगातार अपने बेटे से मिलने की जिद कर रही हैं. अस्पताल के कर्मचारी और पुलिसकर्मी भी आयुष की बेबसी देखकर भावुक हैं क्योंकि वह हर आने-जाने वाले से बस यही गुहार लगा रहा है कि उसकी मां को इस गुनाह की सच्चाई न बताई जाए.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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