किस कानून के तहत राजस्थान में तोड़े जाएंगे 180 मस्जिद-दरगाह? जानिए 50 किलोमीटर सीमा वाला नियम

राजस्थान में भारत और पाकिस्तान की काफी लंबी सरहद है. राज्य सरकार के मुताबिक इंटरनेशनल बॉर्डर का ये एरिया काफी सेंसेटिव है और नेशनल सिक्योरिटी के तहत 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले मस्जिद, मदरसे और दरगाहों पर कार्रवाई की जाएगी.

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Rajasthan: राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के 50 किलोमीटर के दायरे में मौजूद मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को जारी किए गए कारण बताओ, बेदखली और खाली करने के नोटिस को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने माना है कि ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसमें धार्मिक भेदभाव जैसा कुछ नहीं है. ये याचिकाएं कई मदरसों, मस्जिदों और दरगाहों ने दायर की थीं. इनमें अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास मौजूद उनकी संपत्तियों को लेकर सरकारी अधिकारियों की तरफ जारी नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए गए थे. आखिर गृह मंत्रालय का ये कौन सा नियम है जिसका हवाला कोर्ट ने दिया?

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अदालत ने BSF एक्ट का किया जिक्र

जस्टिस समीर जैन ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स एक्ट की धारा 139 के तहत गृह मंत्रालय के 11 अक्तूबर 2021 के नोटिफिकेशन का जिक्र किया, जिसके मुताबिक, केंद्र सरकार ने BSF के अधिकार क्षेत्र और ऑपरेशनल पावर्स को बढ़ाया और उन्हें तर्कसंगत बनाया. इसमें इंटरनेशनल बॉडर्स से 50 किलोमीटर तक के इलाके शामिल थे. ये देखते हुए कि ये कदम व्यापक जनहित में उठाया गया था.

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‘हालात के हिसाब से फैसला’

कोर्ट ने कहा, ‘ये नोटिफिकेशन सबसे ऊंचे लेवल पर लिए गए एक सोच-समझकर किए गए नीतिगत फैसले को दिखाता है. इसमें मौजूदा सुरक्षा हालात, खुफिया जानकारी और तस्करी, घुसपैठ और नेशनल सिक्योरिटी के लिए नुकसानदेह अन्य गतिविधियों जैसे सीमा-पार अपराधों को प्रभावी ढंग से रोकने की जरूरत को ध्यान में रखा गया है. इसलिए, नोटिफ़ाइड जोन में सक्षम अधिकारियों की तरफ से की गई कोई भी प्रशासनिक या रेगुलेटरी कार्रवाई, खासकर अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्शन या एक्टिविटीज के बारे में, इनको बढ़े हुए कानूनी ढांचे और सुरक्षा से जुड़े बढ़ी हुई चिंताओं के बैकड्रॉप में देखा जाना चाहिए.’

कोर्ट ने की गृह मंत्रालय की तारीफ

अदालत ने आगे कहा, ‘ये कोर्ट गृह मंत्रालय की तरफ से 11 अक्टूबर 2021 को जारी नोटिफिकेशन की तारीफ करता है. ये नोटिफिकेशन राष्ट्रीय सुरक्षा और जन-सुरक्षा के हित में कानूनी शक्तियों के सोच-समझकर और नेक नीयत से किए गए इस्तेमाल को दिखाता है. संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने और तर्कसंगत बनाने का फैसला, उभरती सुरक्षा चुनौतियों – जैसे घुसपैठ, सीमा-पार अपराध और देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए अन्य खतरों- से निपटने के लिए एक सक्रिय और अच्छी तरह से सोचे-समझे नजरिए को दर्शाता है. नेक नीयत से उठाए गए और कानूनी अधिकार हासिल हुए ऐसे कदम, देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए राज्य के कमिटमेंट को दिखाते हैं, साथ ही ये भी सुनिश्चित करते हैं कि शासन बदलती जमीनी हकीकत के को लेकर संवेदनशील बना रहे. इसलिए, ये नोटिफिकेशन व्यापक जनहित में उठाए गए एक कदम के तौर पर उचित मान्यता का हकदार है, जो देश और उसके नागरिकों की रक्षा करने के राज्य के संवैधानिक कर्तव्य को मजबूत करता है.’

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कोर्ट में राज्य सरकार की दलील

राजस्थान सरकार ने अदालत में दलील देते हुए कहा है कि मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों समेत कई ऐसे ढांचे हैं जो बिना नियमों का पालन करते हुए बनाए गए हैं, इसके अलावा ये इमारतें सेंसेटिव बॉर्डर एरियाज में हैं. राज्य सरकार ने ये भी कहा है कि उन्हें खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिले हैं, जिसके आधार पर और राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए ये कार्रवाई की जा रही है. सरकार ने सफाई देते हुए ये भी कहा है कि ये एक्शन किसी विशेष धर्म के खिलाफ ने बल्कि नेशनल सिक्योरिटी और लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन रखने के लिए है.

कोर्ट ने धार्मिक भेदभाव की बात खारिज की

कोर्ट ने कहा, ‘रिकॉर्ड पर मौजूद जानकारी से पता चलता है कि सेंसेटिव बॉर्डर एरियाज में जहां भी अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्शन पाए गए हैं, वहां बिना किसी खास समुदाय का भेदभाव किए सभी को नोटिस जारी किए गए हैं. इसलिए, ये साफ करना जरूरी है कि ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और नियमों के पालन से जुड़ा है, न कि धार्मिक भेदभाव से. इसके अलावा, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने खुद माना कि नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा होने की स्थिति में सक्षम अधिकारी उचित कार्रवाई कर सकते हैं. साथ ही, खुली कार्यवाही में संवेदनशील खुफिया जानकारी का खुलासा करना न तो समझदारी है और न ही उचित, क्योंकि ऐसी जानकारी सामने आने होने से सुरक्षा हितों को खतरा हो सकता है.’

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याचिकाकर्ता अब क्या करेंगे?

भले ही राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के ये अर्जी खारिज कर दी हो, लेकिन अदालत ने ये भी सुनिश्चित किया कि हर मामले की अलग-अलग जांच हो, साथ ही ये भी निर्देश दिया है किस संबंधित जिले के कलेक्टर, एसपी और बीएसएफ कि रिप्रेजेंटेटिव की ज्वॉइंट कमेटी बनाई जाए. ये कमेटी हर प्रॉपर्टी को अलग-अलग जांच करेगी, फिर कानून के हिसाब से आगे की कार्रवाई होगी. यानी जिनकी संपत्तियों पर खतरा है उनके लिए अभी भी रास्ता खुला हुआ है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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