Who is Broom Warrior Inderjit Singh Sidhu: पंजाब पुलिस के उप-महानिरीक्षक (DIG) रह चुके चंडीगढ़ के 88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ' ब्रूम वॉरियर' बताते हुए उनकी निःस्वार्थ समाज सेवा की जमकर सराहना की है. 1963 बैच के पूर्व पुलिस अधिकारी सिद्धू पिछले करीब तीन दशकों से रोज सुबह 6 बजे झाड़ू और रेहड़ी लेकर चंडीगढ़ और मोहाली की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों को साफ करते हैं. उनके इसी अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2026 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा है.
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है, और सिद्धू जी ने अपने उदाहरण से इसे पूरे देश के सामने साबित किया है.
‘चंडीगढ़ में मिलता है पुराने लोगों से मिलने का मौका’, जानें PM मोदी के संबोधन की खास बातें
पूर्व DIG से 'झाड़ू वॉरियर' बनने की अनोखी कहानी
Who is Broom Warrior Inderjit Singh Sidhu: 1996 में पुलिस बल से सेवानिवृत्त होने के बाद इंदरजीत सिंह सिद्धू चंडीगढ़ के सेक्टर 49 में रहने लगे. जब उन्होंने 'सिटी ब्यूटीफुल' कहे जाने वाले चंडीगढ़ के स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में पिछड़ने और सड़कों पर कचरे के ढेर देखे, तो उन्होंने नगर निगम या प्रशासन से शिकायत करने के बजाय खुद बदलाव लाने का फैसला किया.
बिना किसी संकोच के 'श्रम का सम्मान'
शुरुआत में जब एक पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को हाथ में झाड़ू और कचरे की रेहड़ी लेकर गलियों में देखा गया, तो लोगों ने आश्चर्य जताया और कुछ ने उन्हें "सनकी" भी कहा. हालांकि, सिद्धू जी का मानना है— "लोग गंदगी फैलाने में शर्म महसूस नहीं करते, तो फिर साफ करने में शर्म कैसी? स्वच्छता ही ईश्वर की भक्ति है."
वर्ष 2025 में उनकी दैनिक सफाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने उनकी सराहना करते हुए लिखा था कि "संकल्प कभी रिटायर नहीं होता और सेवा की कोई उम्र नहीं होती." इसके बाद स्थानीय निवासियों और युवाओं ने भी उनसे प्रेरणा लेकर स्वच्छता अभियानों में हिस्सा लेना शुरू किया.
जब 26 जनवरी 2026 को गृह मंत्रालय से उन्हें 'पद्म श्री' मिलने की सूचना का फोन आया, तब भी उन्होंने अपनी दिनचर्या नहीं बदली. फोन सुनने के तुरंत बाद वे चुपचाप हाथ में झाड़ू लेकर अपनी दैनिक सफाई के लिए निकल गए. यही सादगी और कर्तव्यनिष्ठा उन्हें सच्चा राष्ट्रनायक बनाती है.
Who is Broom Warrior Inderjit Singh Sidhu: पंजाब पुलिस के उप-महानिरीक्षक (DIG) रह चुके चंडीगढ़ के 88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ ब्रूम वॉरियर’ बताते हुए उनकी निःस्वार्थ समाज सेवा की जमकर सराहना की है. 1963 बैच के पूर्व पुलिस अधिकारी सिद्धू पिछले करीब तीन दशकों से रोज सुबह 6 बजे झाड़ू और रेहड़ी लेकर चंडीगढ़ और मोहाली की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों को साफ करते हैं. उनके इसी अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2026 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा है.
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है, और सिद्धू जी ने अपने उदाहरण से इसे पूरे देश के सामने साबित किया है.
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पूर्व DIG से ‘झाड़ू वॉरियर’ बनने की अनोखी कहानी
Who is Broom Warrior Inderjit Singh Sidhu: 1996 में पुलिस बल से सेवानिवृत्त होने के बाद इंदरजीत सिंह सिद्धू चंडीगढ़ के सेक्टर 49 में रहने लगे. जब उन्होंने ‘सिटी ब्यूटीफुल’ कहे जाने वाले चंडीगढ़ के स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में पिछड़ने और सड़कों पर कचरे के ढेर देखे, तो उन्होंने नगर निगम या प्रशासन से शिकायत करने के बजाय खुद बदलाव लाने का फैसला किया.
बिना किसी संकोच के ‘श्रम का सम्मान’
शुरुआत में जब एक पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को हाथ में झाड़ू और कचरे की रेहड़ी लेकर गलियों में देखा गया, तो लोगों ने आश्चर्य जताया और कुछ ने उन्हें “सनकी” भी कहा. हालांकि, सिद्धू जी का मानना है— “लोग गंदगी फैलाने में शर्म महसूस नहीं करते, तो फिर साफ करने में शर्म कैसी? स्वच्छता ही ईश्वर की भक्ति है.”
वर्ष 2025 में उनकी दैनिक सफाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने उनकी सराहना करते हुए लिखा था कि “संकल्प कभी रिटायर नहीं होता और सेवा की कोई उम्र नहीं होती.” इसके बाद स्थानीय निवासियों और युवाओं ने भी उनसे प्रेरणा लेकर स्वच्छता अभियानों में हिस्सा लेना शुरू किया.
जब 26 जनवरी 2026 को गृह मंत्रालय से उन्हें ‘पद्म श्री’ मिलने की सूचना का फोन आया, तब भी उन्होंने अपनी दिनचर्या नहीं बदली. फोन सुनने के तुरंत बाद वे चुपचाप हाथ में झाड़ू लेकर अपनी दैनिक सफाई के लिए निकल गए. यही सादगी और कर्तव्यनिष्ठा उन्हें सच्चा राष्ट्रनायक बनाती है.