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प्रयागराज विवाद में आया नया मोड़, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दोबारा स्नान कराने से प्रशासन का इनकार, हाई कोर्ट पहुंचा मामला

Prayagraj Dispute: प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई कथित मारपीट और स्नान विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. प्रशासन ने दोबारा स्नान कराने की कोशिशों से साफ इनकार किया है.

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Written By: Varsha Sikri Updated: Jan 30, 2026 12:16
swami avimukteshwaranand saraswati
Credit: Social Media

प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मामला अब और गंभीर हो गया है. प्रशासन ने साफ कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दोबारा स्नान कराने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है. वहीं, इस पूरे मामले को लेकर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कोर्ट से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों और बटुकों के साथ संगम स्नान के लिए पहुंचे थे. इसी दौरान पुलिस और प्रशासन के साथ विवाद हो गया. आरोप है कि इस दौरान शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई. इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे धार्मिक अपमान बताते हुए विरोध शुरू कर दिया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों का कहना है कि प्रशासन ने शंकराचार्य की परंपरा और सम्मान का ध्यान नहीं रखा. वहीं, उनके मीडिया प्रभारी ने दावा किया था कि प्रशासन उन्हें मनाने और दोबारा स्नान कराने की कोशिश कर रहा है. लेकिन प्रयागराज प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है.

प्रशासन ने क्या कहा?

प्रशासन का कहना है कि कोई विशेष प्रस्ताव नहीं दिया गया है और न ही दोबारा स्नान कराने की योजना है. अधिकारियों के मुताबिक, माघ मेले में सुरक्षा और व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता है और उसी के अनुसार फैसले लिए गए. इस बीच, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. याचिका में मांग की गई है कि मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. साथ ही, कथित तौर पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई है. कुछ मांगों में सीबीआई जांच की बात भी सामने आई है.

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बिना स्नान किए वापस लौटे अविमुक्तेश्वरानंद

विवाद बढ़ने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कई दिनों तक प्रयागराज में धरना दिया, लेकिन आखिर में वो बिना स्नान किए वाराणसी लौट गए. इस घटना के बाद संत समाज और धार्मिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है. अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं. ये मामला सिर्फ एक संत के सम्मान से जुड़ा नहीं है, बल्कि धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक व्यवस्था के संतुलन से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है.

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First published on: Jan 30, 2026 11:58 AM

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